क्रिकेट के खेल में ‘द वॉल’ यानी ‘दीवार’ के नाम से मशहूर रहे भारतीय बल्लेबाज राहुल द्रविड़ आज अपना 46वां जन्मदिन मना रहे हैं. द्रविड़ 2012 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह चुके हैं, लेकिन आज भी किसी टेस्ट मैच के दौरान विश्लेषक और कॉमेंटेटर उनका जिक्र किए बिना नहीं रहते. पिछले दिनों जब भारतीय टीम इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट सीरीज खेलने गई थी तब सुनील गावस्कर सहित कई दिग्गजों ने भारतीय बल्लेबाजों को द्रविड़ की पारियां देखने की सलाह दी थी. द्रविड़ को अपनी बेहतरीन बल्लेबाजी के लिए साल 2000 में विजडन क्रिकेटर सम्मान और 2004 में आईसीसी ‘प्लेयर ऑफ द ईयर’ और ‘टेस्ट प्लेयर ऑफ द ईयर’ से सम्मानित किया गया था. बल्लेबाजी में एक नई विधा रचने वाले इस पूर्व भारतीय बल्लेबाज को बीते नवंबर में ही आईसीसी क्रिकेट ‘हॉल ऑफ फेम’ में औपचारिक रूप से शामिल किया गया है.

राहुल द्रविड़ इस समय भारतीय ‘ए’ टीम और अंडर-19 टीम के कोच हैं. अपनी इस भूमिका में भी वे अव्वल ही रहे हैं. बीते साल भारतीय अंडर-19 टीम ने उनकी देखरेख में ही विश्वकप का खिताब जीता था. यहां हम अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में राहुल द्रविड़ की उन पांच पारियों का जिक्र कर रहे हैं, जो न केवल कई मायनों में खास हैं बल्कि यह भी बताती हैं कि क्यों इस महान बल्लेबाज को गेंदबाज ‘द वॉल’ से संबोधित करते थे.

पहला टेस्ट लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड - 1996

जून 1996 में लॉर्ड्स क्रिकेट मैदान पर खेली गई राहुल द्रविड़ की यह पारी दो वजहों से ख़ास है. एक तो यह उनका और सौरव गांगुली, दोनों का ही पहला टेस्ट मैच था. वहीं इन दोनों ने ही भारत को इस मैच में हार से बचाया था. बताते हैं कि टॉस से ठीक पहले कोच संदीप पाटिल ने द्रविड़ को जानकारी दी कि उन्हें अंतिम एकादश में शामिल किया गया है. इस मैच की पहली पारी में इंग्लैंड ने 344 रन बनाए. इसके बाद खेलने उतरी भारतीय टीम ने 200 रन तक सचिन तेंदुलकर, अजहरुद्दीन और अजय जडेजा सहित पांच विकेट गंवा दिए थे. तब लगने लगा था कि इंग्लैंड बड़ी बढ़त ले लेगा.

लेकिन सौरव गांगुली और सातवें नंबर पर उतरे राहुल द्रविड़ ने उम्मीदों से उलट अपने इस पहले ही मैच में अविस्मरणीय पारियां खेलीं. गांगुली ने 131 और द्रविड़ ने 267 गेंदों में 95 रन बनाए. इन दोनों की वजह से भारत ने इंग्लैंड पर 85 रन की बढ़त ले ली. कहा जाता है कि इन युवा बल्लेबाजों की बदौलत ही भारत इस मैच का नतीजा हार से ड्रॉ में तब्दील करवाने में सफल हो सका था. विश्लेषक यह भी कहते हैं कि द्रविड़ इस मैच में अंपायर द्वारा आउट दिए जाने से पहले ही पैवेलियन की ओर चल दिए थे. इस वजह से भी वे इस मैच में खासे चर्चा में रहे थे.

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द्रविड़ के वनडे करियर का टर्निंग पॉइंट - टेटन वनडे - 1999

साल 1996 से भारतीय टेस्ट में जगह बनाने के बावजूद द्रविड़ वनडे टीम में अपनी जगह नहीं बना पा रहे थे. यही वजह थी कि जब उन्हें इंग्लैंड में होने वाले 1999 विश्वकप की टीम में चुना गया तो बीसीसीआई के साथ-साथ वे भी आलोचकों के निशाने पर आ गए. आलोचकों का कहना था कि द्रविड़ केवल टेस्ट क्रिकेट खेलने के ही लायक हैं. हालांकि, चयनकर्ताओं ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा था कि राहुल द्रविड़ को विकेटकीपर बल्लेबाज के तौर पर तरजीह दी गई है.

विश्वकप के तीसरे मैच में द्रविड़ ने यादगार पारी खेलकर आलोचकों का मुंह बंद कर दिया. श्रीलंका के खिलाफ हुए इस मैच में द्रविड़ ने 129 गेंदों पर 145 रन की तेज पारी खेली. इस मैच में सौरव गांगुली ने भी यादगार 183 रन बनाये थे और इन दोनों ने दूसरे विकेट के लिए रिकॉर्ड 318 रनों की साझेदारी की थी. 373 रन बनाने वाली भारतीय टीम ने यह मैच 157 रन के बड़े अंतर से जीता था. इस मैच को राहुल द्रविड़ के वनडे करियर का टर्निंग पॉइंट भी कहा जाता है क्योंकि इसके बाद उनकी भारतीय वनडे टीम में जगह पक्की हो गई थी.

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ईडन गार्डन कोलकाता - 2001

साल 2001 में कोलकाता के ईडन गार्डन के मैदान पर खेले गए इस मैच को टेस्ट क्रिकेट के इतिहास का सबसे चौंकाने वाला मैच कहा जाता है. बॉर्डर-गावस्कर सीरीज के इस मैच की पहली पारी में ऑस्ट्रेलिया ने 445 रन का बड़ा स्कोर खड़ा किया था. भारत के लिए स्थिति तब और खराब हो गई जब पूरी टीम महज 171 रन पर ही सिमट गयी और फॉलोऑन भी नहीं बचा सकी.

ऑस्ट्रेलिया से 274 रनों से पिछड़ने के बाद भारत के लिए यह मैच जीतना लगभग नामुमकिन जैसा लग रहा था. लेकिन इसके बाद राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण ने जो किया वह स्वर्णिम इतिहास हो गया. फॉलोऑन के दौरान 232 रन पर चार विकेट गिरने के बाद इन दोनों ने मोर्चा संभाला. लक्ष्मण ने 281 और द्रविड़ ने 180 रनों की पारियां खेल भारत की मैच में वापसी कराई. दोनों के बीच 101.4 ओवर में 376 रन की रिकॉर्ड साझेदारी हुई थी. इसके बाद भारत ने 657 रनों पर अपनी दूसरी पारी घोषित की. ऑस्ट्रेलिया को जीत के लिए 384 रनों का लक्ष्य मिला, लेकिन भारतीय स्पिनर हरभजन सिंह ने छह विकेट लेकर ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी. पूरी मेहमान टीम महज 171 रनों पर ढ़ेर हो गई.

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एडिलेड टेस्ट - 2003

साल 2003 में ऑस्ट्रेलिया के एडिलेड मैदान में भारत ने एक असंभव सी जीत दर्ज की थी और इसके नायक बने थे टीम के सबसे भरोसेमंद बल्लेबाज राहुल द्रविड़. द्रविड़ ने इस मैच में जो पारी खेली थी उसे विदेशी धरती पर किसी भारतीय बल्लेबाज द्वारा खेली गई सर्वश्रेष्ठ पारियों में गिना जाता है.

एडीलेड में हुए इस मैच में ऑस्ट्रेलिया ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 556 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया था. इसके जवाब में भारतीय टीम 85 रन पर चार विकेट खोकर लड़खड़ाने लगी. इसके बाद वीवीएस लक्ष्मण और राहुल द्रविड़ ने पारी को संभाला. दोनों दिग्गजों ने 303 रनों की साझीदारी की. लक्ष्मण के 148 और द्रविड़ की 446 गेंदों में 233 रन की मैराथन पारी ने भारत का स्कोर 523 पर पहुंचा दिया.

जानकारों के मुताबिक द्रविड़ की इस शानदार बैटिंग का ही असर था कि दूसरी पारी में ऑस्ट्रेलिया की पूरी टीम सिर्फ 196 रन ही बना सकी. तब अजित अगरकर ने 41 रन देकर छह विकेट लिए थे. इसके बाद 233 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए एक बार फिर राहुल द्रविड़ ने नाबाद 72 रन बनाए और भारत को जीत की देहरी तक ले गए.

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ब्रिस्टल वनडे इंग्लैंड - 2007

इंग्लैंड के ब्रिस्टल मैदान पर खेली गई राहुल द्रविड़ की इस पारी को वनडे क्रिकेट में उनकी सबसे तेज पारियों में से एक माना जाता है. 2007 में उनके ही नेतृत्व में नेटवेस्ट सीरीज खेलने इंग्लैंड पहुंची भारतीय टीम का यह दूसरा मैच था. भारत ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का निर्णय लिया. सचिन तेंदुलकर और सौरव गांगुली ने पारी की शुरुआत की और पहले विकेट के लिए 19.3 ओवर में 113 रन जोड़े. गांगुली के आउट होने के बाद द्रविड़ ने अपनी जगह युवराज सिंह को तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी करने भेजा. युवराज ने इस फैसले को सही साबित करते हुए 49 रन बनाए.

सचिन के 99 रन पर आउट होने के बाद द्रविड़ चौथे नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरे और मैच की दिशा ही बदल दी. उन्होंने 63 गेंदों में 11 चौके और एक छक्के की मदद से नाबाद 92 रन बनाए. अंतिम आठ ओवरों में द्रविड़ की पारी देखने लायक थी. इस दौरान उन्होंने केवल 28 गेंदों पर ताबड़तोड़ 56 रन बनाये. काफी रोमांचक हुए इस मुकाबले में भारत ने नौ रनों से जीत दर्ज की थी.

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