केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के निदेशक पद से हटाए गए आलोक वर्मा ने भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) से अपना इस्तीफा दे दिया है. स्क्रोल डॉट इन के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में गुरुवार को चयन समिति की बैठक हुई थी. इस बैठक में उन्हें अग्निशमन विभाग, नागरिक सुरक्षा और होम गार्ड्स के महानिदेशक के रूप में नई जिम्मेदारी सौंपे जाने का फैसला हुआ था. उधर, शुक्रवार को नई जिम्मेदारी स्वीकार करने से पहले ही उन्होंने कार्मिक एवं प्रशिक्षण सचिव सी चंद्रमौली को अपना इस्तीफा भेज दिया.

अपने इस्तीफे में उन्होंने लिखा है कि चयन समिति ने उन्हें सफाई देने का कोई मौका नहीं दिया. साथ ही केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) द्वारा उन पर लगाए आरोपों के आधार पर अंतिम निष्कर्ष निकाल लिया. वर्मा ने इसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के विपरीत बताया है. इसके साथ ही उन्होंने यह भी लिखा है, ‘सीबीआई की साख बर्बाद करने की कोशिश की जा रही है. मैंने इसे बनाए रखने की कोशिश की लेकिन मुझे निदेशक पद से हटा दिया गया.’

इससे पहले आलोक वर्मा को लेकर गुरुवार को हुई चयन समिति की बैठक में प्रधानमंत्री के अलावा लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की तरफ से जस्टिस एके सीकरी ने हिस्सा लिया था. प्रधानमंत्री और जस्टिस सीकरी, आलोक वर्मा को पद से हटाने के पक्ष में थे. लेकिन खड़गे ने इसका विरोध किया था. खड़गे का यह भी कहना था कि सरकार ने उन्हें जबरन 77 दिन की छुट्टी पर भेजा था, इसलिए उन्हें इतने ही दिन का अतिरिक्त कार्यकाल मिलना चाहिए.

इससे पहले बीते साल अक्टूबर में सीबीआई के ही विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के साथ वर्मा का विवाद सामने आया था. उसी विवाद के मद्देनजर सरकार ने अस्थाना और वर्मा दोनों को छुट्टी पर भेजते हुए उनकी शक्तियां वापस ले ली थीं. वर्मा ने सरकार के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. सुनवाई पूरी करने के बाद शीर्ष अदालत ने बीते मंगलवार को उन्हें उनके पद पर बहाल करने का आदेश दिया था.

1979 बैच के आईपीएस अधिकारी आलोक वर्मा सीबीआई के 27वें निदेशक थे. इससे पहले उन्होंने दिल्ली पुलिस के आयुक्त के तौर पर भी अपनी सेवाएं दी थीं. इसी महीने की 31 तारीख को वे सेवानिवृत्त भी होने वाले थे. लेकिन सेवानिवृत्ति से चंद दिन पहले ही उन्होंने पुलिस सेवा से अपना इस्तीफा दे दिया.