दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करने से इनकार किया है. स्क्रोल डॉट इन के मुताबिक इसके साथ ही हाई कोर्ट ने सीबीआई को इस संबंध में दस हफ्ते के भीतर जांच पूरी करने के निर्देश भी दिए हैं. राकेश अस्थाना के खिलाफ यह एफआईआर रिश्वतखोरी के एक मामले में दर्ज की गई थी. इस पर राहत पाने के लिए अस्थाना के अलावा सीबीआई के डीएसपी देवेंद्र कुमार व कथित बिचौलिये मनोज प्रसाद ने कोर्ट में अर्जी दाखिल की थी.

अस्थाना पर भ्रष्टाचार रोकथाम कानून की विभिन्न धाराओं के तहत आपराधिक साजिश व भ्रष्टाचार के आरोप हैं. बताया जाता है कि मांस कारोबारी मोइन कुरैशी के एक मामले में हैदराबाद के व्यापारी सतीश बाबू सना ने कथित तौर पर राकेश अस्थाना को रिश्वत दी थी. करीब तीन करोड़ रुपये रिश्वत के तौर पर देने का खुलासा खुद सना ने किया था.

रिश्वतखोरी के इस खुलासे के बाद सीबीआई के पूर्व निदेशक आलोक वर्मा ने अस्थाना के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए थे. उधर, राकेश अस्थाना ने आलोक वर्मा पर सना से दो करोड़ रुपये की रिश्वत लेने का आरोप लगाया था. सीबीआई के दो वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा एक-दूसरे पर रिश्वतखोरी का आरोप लगाने पर सरकार ने बीते साल अक्टूबर में उन दोनों को छुट्टी पर भेज दिया था.

सरकार के उस फैसले को आलोक वर्मा ने तब सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. इसी मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने सीमित शक्तियों के साथ आलोक वर्मा को उनके पद पर बहाल करने के आदेश दिए थे. हालांकि गुरुवार को सीबीआई से उनका तबादला अग्निशमन, नागरिक सुरक्षा और होम गार्ड्स के महानिदेशक के तौर पर कर दिया गया था. इसके बाद शुकवार को वर्मा ने पुलिस सेवा से अपना इस्तीफा दे दिया. उधर, सीबीआई के अतिरिक्त निदेशक एम नागेश्वर राव को फिलहाल सीबीआई निदेशक का कार्यभार सौंपा गया है.