प्रिय श्री चंद्रमौली जी (कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग के सचिव)

10 जनवरी 2019 के आदेश के अनुसार मेरा सीबीआई से तबादला करके मुझे फायर सर्विसेज, सिविल डिफेंस और होम गार्ड महानिदेशक बनाया गया है.

1. चयन समिति ने फ़ैसला लेने से पहले मुझे सीवीसी द्वारा दर्ज विवरणों पर सफाई का मौका नहीं दिया. न्याय जानबूझ कर नहीं दिया गया और पूरी प्रक्रिया को सिर के बल खड़ा कर दिया गया ताकि मुझे सीबीआई निदेशक के पद से हटा दिया जाये. चयन समति ने इस तथ्य पर विचार नहीं किया कि सीवीसी की रिपोर्ट में आधार उस शिकायतकर्ता के आरोपों को बनाया गया है जिसके खिलाफ खुद सीबीआई जांच चल रही है. यह भी ध्यान दिया जाना चाहिए कि सीवीसी ने केवल उस शिकायतकर्ता के कथित रूप से हस्ताक्षरित बयान को आगे बढ़ाया और शिकायतकर्ता इस जांच की निगरानी कर रहे माननीय (रिटायर्ड) जस्टिस एके पटनायक के सामने कभी नहीं पेश हुआ. इसके अलावा जस्टिस पटनायक ने भी कहा है कि (सीवीसी की) रिपोर्ट के निष्कर्ष उनके नहीं हैं.

2. हमारे लोकतंत्र के सबसे मजबूत प्रतीकों में से हैं हमारी संस्थाएं और यह कोई बढ़ा-चढ़ाकर कही गई बात नहीं है कि सीबीआई आज भारत की सबसे महत्वपूर्ण संस्थाओं में से है. गुरुवार को लिए गए फ़ैसले न केवल मेरे कामकाज पर असर डालेंगे बल्कि इस बात का साक्ष्य भी बनेंगे कि एक संस्था के रूप में कोई भी सरकार सीवीसी के ज़रिए सीबीआई के साथ कैसा बर्ताव करेगी, जिन्हें सत्तासीन सरकार के सदस्यों के बहुमत के आधार पर नियुक्त किया जाता है. यह सबके लिए आत्मनिरीक्षण का वक्त है. कम से कम राज्य व्यवस्था के लिए तो है ही.

3. सेवा के चार दशक के दौरान मेरी ईमानदारी ही मेरी प्रेरक शक्ति रही है. मैंने एक बेदाग रिकॉर्ड के साथ भारतीय पुलिस सर्विस की सेवा की है और अंडमान, निकोबार द्वीप समूह, पुदुचेरी, मिजोरम और दिल्ली में पुलिस बलों के साथ ही दिल्ली जेल और सीबीआई जैसे दो संगठनों की अगुवाई भी की है.

इसे मैं अपना सौभाग्य समझता हूं कि जिन बलों का नेतृत्व मैंने किया है उनका मुझे अमूल्य समर्थन मिला इसका नतीजा वे असाधारण उपलब्धियां थीं जिनका इन बलों के प्रदर्शन और बेहतरी पर सीधा असर पड़ा. मैं भारतीय पुलिस सर्विस और विशेषकर उन संगठनों को धन्यवाद देना चाहता हूं जिनमें मैंने अपनी सेवाएं दीं.

इसके अलावा, यह भी उल्लेखनीय है कि मैंने 31 जुलाई 2017 को अपनी सरकारी सेवा पूरी कर ली थी और मैं केवल 31 जनवरी 2019 तक सीबीआई निदेशक के रूप में सरकार की सेवा कर रहा था, क्योंकि यह दो साल के लिए निर्धारित कार्यकाल था.

चूंकि अब मैं सीबीआई निदेशक नहीं हूं और पहले ही डीजी फायर सर्विसेज, सिविल डिफेंस और होम गार्ड्स के लिए अपनी सेवानिवृत्ति की उम्र को पार कर चुका हूं, इसलिए मुझे आज से ही सेवानिवृत माना जाए.

धन्यवाद

सादर

आलोक कुमार वर्मा