मोदी जी, साल के पहले ही दिन आपका इंटरव्यू आने की कोई खास वजह थी क्या?

लोगों की धारणा है कि साल के पहले दिन वे जो करते हैं, फिर सालभर वही करते रहते हैं. तो इसलिए मैंने साल के पहले दिन इंटरव्यू दिया ताकि लोग समझ जाएं कि अब मेरे मीडिया से दूर रहने के दिन खत्म हुए. आप देखिए कि मैंने चुप्पी के मामले में भी मौन सिंह...अब्ब्ब मेरा मतलब मनमोहन सिंह को पीछे छोड़ दिया था. मेरा ये स्वसंकल्प खत्म हुआ, अब आने वाले पांच साल के दौरान मैं खूब इंटरव्यू दूंगा.

लेकिन बतौर प्रधानमंत्री तो आपने अपने कार्यकाल के दौरान एक भी संवाददाता सम्मेलन नहीं किया. आखिर क्यों?

देखिए, इतने सारे सवालों की सूचियों को एक साथ पढ़ना, आसान सवालों को फाइनल करना, मुश्किल सवालों को छांटना, ये सब काफी समय खपाने वाला काम है. आपको पता होना चाहिए कि मेरे सिर पर आने वाले चुनाव का कितना बोझ है...और वैसे भी एक दूसरी दिक्कत ये है कि जब सारी सूचियों के सवाल एक साथ किए जाते तो जवाब देने में गलती भी हो सकती थी!

पर 2019 के चुनाव का दबाव तो अभी आया है न. अब से पहले इन पांच सालों में आपने कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस क्यों नहीं की?

आपको ऐसा लग रहा है कि चुनावों का दबाव अभी आया है. पर सच ये है कि मैं तो पांच साल लगातार ही चुनाव प्रचार के दबाव में रहा हूं!...इतने बड़े देश में सालभर कहीं न कहीं, कोई न कोई चुनाव तो होता ही रहता है. कहीं विधानसभा, कहीं महानगरपालिका, तो कहीं नगरनिगम. इन चुनावों की वजह से मैं कोई काम कर ही कहां सका. यही कारण है कि मैं पूरे देश की विधानसभाओं और लोकसभा का चुनाव एक साथ कराना चाहता हूं... फिर कम से कम बाकी समय व्यक्ति काम तो कर पाएगा. अभी तो एक चुनाव हारे या जीते नहीं कि दूसरे की रणनीति पर काम शुरू हो जाता है. ऐसे में आप किसी से काम करने की क्या उम्मीद कर सकती हैं!

मोदी जी, लोग कहते हैं कि आपके इंटरव्यू फिक्स होते हैं. इसमें कितनी सच्चाई है?

उतनी ही जितनी रफाल सौदे में घोटाले की बात में! अब्ब्ब...मेरा कहने का मतलब है कि ये विपक्ष द्वारा फैलाया गया झूठ है. क्या आपने इस इंटरव्यू से पहले मुझे सवालों की कोई सूची भेजी थी...? भेजी थी? नहीं न! तो फिर आप समझ सकती हैं कि मैंने सारे इंटरव्यू इसी तरह दिए होंगे.

सुनने में तो यह भी आ रहा है कि एक जनवरी वाले इंटरव्यू के साथ ही आपने चुनाव प्रचार शुरू कर दिया है. क्या कहेंगे इस पर?

(हैरानी से) सिर्फ इसी इंटरव्यू से!...क्या मेरी बाकी चीजों में किसी को कोई प्रचार नहीं दिखा! आखिर इन पांच सालों में मैंने अपने और पार्टी के प्रचार से अलग और किया ही क्या है? देखिए ये दौर बाजार का है और अपने सामान के विज्ञापन की जिम्मेदारी भी उत्पादक की ही होती है. वहीं बड़े उत्पादों के तो बाजार में आने से पहले ही विज्ञापन आने लगते हैं. मैं क्या उत्पाद...अरे मतलब कि योजनाओं के लागू होने के बाद भी उनका बढ़-चढ़कर प्रसार-प्रचार न करूं?

वह आपका पहला इंटरव्यू माना जा सकता है जिसमें कई विवादित मुद्दों पर भी आपसे सवाल किए गए. आखिर यह कैसे हुआ?

अरे अब तो विवादित ढांचे पर भी अंतिम बातचीत शुरू हो गई, फिर मैं भला विवादित मुद्दों पर कब तक चुप रहूंगा! आप अगला सवाल कीजिए (हंसते हुए).

मोदी जी, क्या आप 2019 का चुनाव हार्ड नहीं बल्कि सॉफ्ट हिंदुत्व पर लड़ने जा रहे हैं?

ऐसा है कि मैं व्यापार और व्यापारियों की धरती से हूं, इसीलिए एक अच्छे व्यापारी के सभी लक्षण मुझमें हैं. ये बात आप इन पांच सालों में समझ ही गई होंगी....और एक अच्छा व्यापारी कभी किसी भी चीज को लेकर कट्टर नहीं होता. वो हवा के रुख के हिसाब से हर वक्त बदलने को तैयार रहता है और इसलिए मैं भी सकारात्मक बदलाव के लिए हमेशा तैयार रहता हूं. असल में तो मैं शुरू से ही सॉफ्ट था कट्टर तो आप मीडिया वाले हैं. 2002 के बाद मीडिया ने मेरी जो कट्टर छवि बनाई थी, आज 16 साल बाद भी आप लोग उसे बदलने को तैयार नहीं. इतने सालों में तो मेरी शक्ल भी बदल गई और आप हैं कि मेरी छवि तक बदलने को तैयार नहीं! बताइए फिर कट्टर कौन हुआ, आप या मैं?

अच्छा यह बताइए कि आपके और राहुल गांधी के सॉफ्ट हिंदुत्व में क्या फर्क है?

बहुत फर्क है. राहुल जी के सॉफ्ट हिंदुत्व में गाय के सिर्फ दूध के उपयोग की बात होती है. वहीं मेरे सॉफ्ट हिंदुत्व में गाय की छवि से लेकर, गौमूत्र और गोबर के भी प्रयोग की बात होती है. तो मेरा हिंदुत्व अधिक व्यापक हुआ कि नहीं!

यह बताइए कि सौदे के मुताबिक तैयार हालत में भारत को 36 रफाल कब तक मिलेंगे?

(हड़बड़ाते हुए) यह सवाल तो मुझे दी गई सवालों की सूची में नहीं था...अर्र मेरा मतलब है कि मां गंगा की सफाई पूरी होने से पहले ही वे रफाल आ जाएंगे.

आपकी सरकार द्वारा गरीब सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण देने को मायावती चुनावी एजेंडा बता रही हैं. इस पर क्या कहेंगे?

इसका साफ मतलब है कि वे मेरी बाकी सभी योजनाओं को विकास का एजेंडा मानती हैं चुनाव का नहीं! ये तो बड़ी खुशी की बात है.

मोदी जी, आपने पांच साल पहले जो घोषणाएं की थीं, क्या वे सभी पूरी हो गई हैं?

अभी कुछ देर पहले ही तो मैंने आपसे कहा था कि इन पांच सालों में चुनाव प्रचार से अलग चुनावी घोषणाओं पर काम करने का मुझे समय ही कहां मिला. बीते पांच सालों में लोगों ने मेरा चुनावी प्रचार का तरीका, इतिहास की जानकारी और जुमलेबाजी देखी. इसलिए तो मैं लोगों से अपील करना चाहता हूं कि अब अगले पांच साल वे मुझे काम करते हुए भी देख लें. मुझे पूर्ण विश्वास है कि जैसे जनता सालभर मेरे चुनाव प्रचार के तरीके और अभिनय से अभिभूत हुई है, वह मुझे काम करते हुए देखकर भी खुश होगी.

मोदी जी, आपने पांच साल पहले लोगों के अकाउंट में 15 लाख रुपए डालने की बात कही थी. आखिर वे पैसे अभी तक आए क्यों नहीं?

अरे मैंने उर्जित पटेल को समझाने की बहुत कोशिशें कीं, पर उन्होंने चमड़ी दे दी लेकिन दमड़ी न दी!

लेकिन मोदी जी, ये पैसा तो विदेशों में जमा भारतीयों के काले धन से लोगों को मिलने वाला था न?

अरे नोटबंदी के बाद से देश-विदेश में काला धन बचा ही कहां है? ...फिर वाइट मनी तो चाहे मैं रिजर्व बैंक से निकालूं या फिर स्विस बैंक से, जनता को क्या ही फर्क पड़ता है!

एक अंतिम सवाल. नरेन्द्र मोदी फिल्म में आपकी भूमिका निभाने वाले विवेक ओबेरॉय के बारे में आप क्या कहेंगे?

मेरे जैसे लुक का क्या है, विवेक ओबेरॉय मुझसे बेहतर एक्टिंग करके दिखाएं तो मानूं! (हंसते हुए)