केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) विवाद से जुड़ी खबरों को बीते कई दिनों की तरह आज के अखबारों ने एक बार फिर पहले पन्ने पर जगह दी है. बीते गुरुवार को सीबीआई निदेशक के पद से हटाए जाने के बाद आलोक वर्मा ने पुलिस सेवा से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने अपने इस्तीफे में लिखा है कि चयन समिति ने उन्हें सफाई देने का कोई मौका नहीं दिया. वहीं, दिल्ली हाई कोर्ट ने सीबीआई के अतिरिक्त निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने से इनकार कर दिया है. आरोपित अधिकारी के खिलाफ यह प्राथमिकी रिश्वत लेने के एक मामले में दर्ज की गई है.

आलोक वर्मा द्वारा सीवीसी की रिपोर्ट को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) विवाद थमता हुआ नहीं दिखता है. नवभारत टाइम्स ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि इसके पूर्व निदेशक आलोक वर्मा ने अपने खिलाफ केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) की रिपोर्ट को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का फैसला किया है. हालांकि, वे खुद को सीबीआई-निदेशक के पद से हटाए जाने के चयन समिति के फैसले को चुनौती नहीं देंगे. उधर, सुप्रीम कोर्ट में वकील प्रशांत भूषण एम नागेश्वर राव को अंतरिम सीबीआई निदेशक बनाए जाने के फैसले को चुनौती देने की तैयारी में हैं. वहीं, सरकार भी इन कानूनी चुनौतियों से निपटने के लिए खुद को तैयार कर रही है. बताया जाता है कि इस संबंध में एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई गई थी. इसमें प्रधानमंत्री कार्यालय के अधिकारियों के साथ कानून मंत्रालय और कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग के अधिकारी शामिल हुए थे.

खराब हिप इंप्लांट मामले में जॉनसन एंड जॉनसन पर 1.22 करोड़ रुपये का जुर्माना

सुप्रीम कोर्ट ने खराब हिप इंप्लांट की आपूर्ति किए जाने के मामले में अमेरिकी कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन पर 1.22 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है. अमर उजाला में प्रकाशित खबर के मुताबिक केंद्र सरकार की हर्जाने की रकम पर विचार करने के बाद शीर्ष अदालत ने यह फैसला लिया. इससे पहले कंपनी के खिलाफ दायर याचिका में कहा गया था कि साल 2005 से अब तक 4525 मरीजों में दोषपूर्ण हिप इंप्लांट किए गए हैं. साथ ही, इस याचिका में उन अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई किए जाने की मांग गई है जिन्होंने क्लीनिकल ट्रायल के इस तरह के उपकरण को बेचने की अनुमति दी थी.

‘खदान से यदि सभी 15 मजदूर बाहर निकल आते हैं तो चमत्कार पर भरोसा करना होगा’

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि मेघालय के एक खदान से यदि सभी 15 मजदूर बाहर निकल आते हैं तो चमत्कार पर भरोसा करना होगा. ये मजदूर करीब एक महीने से एक अवैध खदान में फंसे हुए है. हिन्दुस्तान में छपी रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र ने शीर्ष अदालत को बताया कि इन्हें बचाने के लिए नौसेना के साथ-साथ वायुसेना के विमानों और हेलिकॉप्टरों की मदद ली जा रही है. वहीं, राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि खदान से अब तक एक करोड़ लीटर पानी बाहर निकाला जा चुका है. हालांकि, इसके पास की नदी से इसमें हो रहा रिसाव बचाव कार्य में बाधाएं पैदा कर रहा है. साथ ही, जिस खदान में मजदूर फंसे हुए हैं, वह कम से कम 20 अन्य खदानों से भी जुड़ा हुआ है. वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों की इन कोशिशों से संतुष्टि जाहिर की है. साथ ही, इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख 18 जनवरी तय की है.