सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज एके पटनायक ने कहा है कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के निदेशक पद से हटाए गए आलोक वर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार के कोई सबूत नहीं हैं. जस्टिस पटनायक सुप्रीम कोर्ट के ही कहने पर सीवीसी की जांच के दौरान निगरानी कर कर रहे थे. इंडियन एक्सप्रेस द्वारा इस मामले के हालिया घटनाक्रम पर सवाल किए जाने पर उन्होंने कहा कि वर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार के कोई आरोप नहीं हैं और जो भी सीवीसी की रिपोर्ट कहती है वह अंतिम फैसला नहीं हो सकता.

खबर के मुताबिक जस्टिस पटनायक ने कहा, ‘भले ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उच्चाधिकार समिति को इसका फैसला करना चाहिए, (लेकिन) फिर भी यह फैसला बहुत जल्दबाजी में किया गया. हम यहां एक संस्था के साथ काम कर रहे हैं. उन्हें ध्यानपूर्वक इसे देखना चाहिए था. खास तौर पर तब, जब एक सुप्रीम कोर्ट का जज (जस्टिस एके सीकरी) वहां मौजूद था. सीवीसी जो कहता है, वह अंतिम शब्द नहीं हो सकता’

जस्टिस पटनायक ने कहा कि विशेष सीबीआई निदेशक राकेश अस्थाना की शिकायत के बाद वर्मा के खिलाफ पूरी जांच बिठाई गई थी. पूर्व न्यायाधीश ने कहा कि उन्होंने अपनी रिपोर्ट में बताया कि सीवीसी की रिपोर्ट में कोई भी निष्कर्ष उनका नहीं है. अखबार ने लिखा है कि सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान जस्टिस पटनायक ने मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ को बताया था कि सीवीसी ने उन्हें नौ नवंबर, 2018 को एक बयान भेजा जिस पर कथित रूप से राकेश अस्थाना के हस्ताक्षर थे. उन्होंने कोर्ट को बताया, ‘मैं साफ करना चाहता हूं कि राकेश अस्थाना के कथित हस्ताक्षर वाला यह बयान मेरी मौजूदगी में नहीं तैयार किया गया.’

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली चयन समिति ने 2:1 के बहुमत के साथ आलोक वर्मा को सीबीआई निदेशक पद से हटाते हुए उनका ट्रांसफर कर दिया था. अगले ही दिन आलोक वर्मा ने नौकरी से इस्तीफा दे दिया था. उन्होंने अपने इस्तीफे में लिखा है कि चयन समिति ने उन्हें सफाई देने का कोई मौका नहीं दिया