अरुणाचल प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव में नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) अकेले मैदान में उतरेगी. अरुणाचल प्रदेश में लोक सभा के साथ ही विधानसभा का चुनाव होना है. यहां एनपीपी भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार में शामिल है.

एनपीपी अभी भाजपा के नेतृत्व वाले पूर्वोत्तर लोकतांत्रिक गठबंधन (एनईडीए) का भी हिस्सा है. इसके बावज़ूद एनपीपी के अध्यक्ष और मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा ने अलग चुनाव लड़ने का ऐलान किया है. उनके इस ऐलान को नागरिकता कानून में संशोधन की नरेंद्र मोदी सरकार की कोशिश के प्रति नाराज़गी से जोड़कर देखा जा रहा है. नागरिकता कानून में संशोधन के ज़रिए मोदी सरकार बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान से आए ग़ैर-मुस्लिम शरणार्थियों काे आसानी से भारतीय नागरिकता देने का बंदोबस्त कर रही है.

नागरिकता कानून में इस संशोधन का पूर्वोत्तर के दलों ने खुलकर विरोध किया है. इनमें एनईडीए के एनपीपी जैसे घटक दल भी हैं. हालांकि संगमा ने एनईडीए छोड़ने की घोषणा नहीं की है. उन्होंने मीडिया से कहा, ‘एनपीपी ने एनईडीए का हिस्सा रहते हुए अरुणाचल प्रदेश में अधिक से अधिक विधानसभा सीटों पर अकेले लड़ने की योजना बनाई है.’ एनईडीए को आर्थिक विकास की योजना बनाने का वाला एक मंच बताते हुए संगमा ने कहा कि हर पार्टी को उसकी पहचान बनाए रखने का अधिकार है, जो एनपीपी भी करेगी.