केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार असम समझौते के उपबंध-6 को लागू करने का रास्ता खोज रही है. इस पर विचार के लिए उसने एक उच्चस्तरीय समिति बनाई थी. लेकिन यह समिति काम शुरू करती उससे पहले ही इसके प्रमुख पूर्व केंद्रीय पर्यटन सचिव एमपी बेज़बरुआ ने पद छोड़ दिया है. हालांकि पहले वे यह ज़िम्मेदारी संभालने के लिए तैयार हो गए थे.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार असम समझौते का छठा उपबंध राज्य के स्थानीय नागरिकों के हितों, उनकी संस्कृति और परंपरा के संरक्षण से संबंधित है. इस पर विचार के लिए बनाई गई समिति को यह भी देखना था कि असम की कितनी सीटें स्थानीय लोगों के लिए आरक्षित की जा सकती हैं. केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने बीते मंगलवार को लोक सभा में नागरिकता संशोधन विधेयक पेश करते हुए इस नौ सदस्यीय समिति के गठन की जानकारी दी थी.

हालांकि समिति में जिन सदस्यों को शामिल किया गया उनमें से पांच ने ज़िम्मेदारी लेने से इंकार कर दिया. इसके बाद बेज़बरुआ ने भी केंद्रीय गृह मंत्रालय को लिखे पत्र में कहा, ‘जो परिस्थितियां (सदस्यों द्वारा पेशकश ठुकराने के संदर्भ में) हैं, उन्हें देखते हुए उच्चस्तरीय समिति निष्क्रिय हो चुकी है. इसलिए इसके प्रमुख के तौर पर मेरी उपयोगिता भी नहीं रही. लिहाज़ा मैं यह ज़िम्मेदारी छोड़ रहा हूं.’

बताया जाता है कि यह स्थिति नागरिकता संशोधन विधेयक के विरोध की वज़ह से बनी है. इस विधेयक का असम सहित पूरे पूर्वोत्तर में काफ़ी विरोध हो रहा है. नागरिकता कानून में संशोधन के ज़रिए मोदी सरकार पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान और बांग्लादेश के ग़ैर-मुस्लिम शरणार्थियों को आसानी से भारत की नागरिकता देने का बंदोबस्त कर रही है. संशोधन विधेयक संसद में विचाराधीन है.