सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस आरएम लोढ़ा ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को स्वायत्ता दिए जाने की वकालत की है. खबरों के मुताबिक उन्होंने यह बात सीबीआई के पूर्व निदेशक आलोक वर्मा को उनके पद से हटाए जाने और फिर उनके इस्तीफे को लेकर कही है. उन्होंने यह भी कहा, ‘अब वक्त आ गया है कि सीबीआई को राजनीति के प्रभाव से अलग किया जाए. जब तक यह संस्था राजनीतिक कार्यकारिणी (सरकार) के नियंत्रण में रहेगी ऐसी घटनाएं होती रहेंगी.’

जस्टिस लोढ़ा ने इशारों में आगे कहा, ‘तोता तब तक आसमान में पूरी तरह नहीं उड़ सकता जब तक उसे खुला नहीं छोड़ा जाएगा. समय आ गया है कि इस बारे में कुछ किया जाए. कुछ ऐसा जिससे कि सीबीआई एक उच्चस्तरीय जांच एजेंसी बन सके.’ दिलचस्प बात यह है कि जस्टिस लोढ़ा ने ही पूर्व में सीबीआई के लिए ‘पिंजरे में कैद तोता’ शब्दों का इस्तेमाल किया था. यूपीए सरकार के समय सामने आए कोयला घोटाले पर सुनवाई करते हुए तब उन्होंने सीबीआई को केंद्र सरकार की इच्छाओं का गुलाम भी बताया था.

उधर, आलोक वर्मा के खिलाफ केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) की जांच की निगरानी करने वाले जस्टिस एके पटनायक की भी टिप्पणी आई है. जस्टिस पटनायक ने वर्मा को पद से हटाए जाने के फैसले को ‘जल्दबाजी में किया गया निर्णय’ बताया है. इसके साथ ही उनका यह भी कहना है कि आलोक वर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार के कोई सबूत नहीं हैं.

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली चयन समिति ने बीते गुरुवार आलोक वर्मा को उनके पद से हटाने का फैसला किया था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के प्रतिनिधि के तौर पर इस समिति में शामिल जस्टिस एके सीकरी वर्मा को पद से हटाने के पक्ष में थे. लेकिन लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस पर असहमति जताई थी. पद से हटाए जाने के अगले ही दिन शुक्रवार को आलोक वर्मा ने इस्तीफा दे दिया था.