राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सवर्ण आरक्षण विधेयक पर अपनी मंजूरी दे दी है. उनकी इस मंजूरी के साथ ही सरकार ने भी अपनी तरफ से इसे लेकर अधिसूचना जारी कर दी है. अब एक हफ्ते के भीतर यह विधेयक कानून का रूप ले लेगा. इस कानून से आठ लाख रुपये से कम की सालाना आय वाले सवर्णों को शिक्षा और नौकरियों में दस फीसदी के आरक्षण का लाभ मिलने लगेगा.

संसद के दोनों सदनों में यह विधेयक इसी हफ्ते पारित हुआ था. बीते मंगलवार को लोकसभा में इसके पक्ष में 323 ज​बकि विरोध में तीन वोट पड़े थे. राज्यसभा में यह विधेयक सात के मुकाबले 156 वोटों से पारित हुआ था.

सवर्णों के लिए आरक्षण की इस नई व्यवस्था के लागू होने से आरक्षण की सीमा बढ़कर 59.5 फीसदी हो जाएगी. हालांकि इस व्यवस्था का अनुसूचित जाति, जनजाति व अन्य पिछड़े वर्ग को पहले से मिल रहे आरक्षण पर कोई असर नहीं पड़ेगा. इन जातियों के लिए 49.5 फीसदी के आरक्षण व्यवस्था है.

हालांकि इस विधेयक के दोनों सदनों में पारित होने के बाद यूथ फॉर इक्वलिटी नाम के एक संगठन ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती भी दी है. इस संस्था का तर्क है कि आर्थिक आधार पर आरक्षण की व्यवस्था को लागू नहीं किया जा सकता. इसके साथ ही संगठन ने इसे ‘संविधान की मूल भावना’ के खिलाफ भी बताया है.