सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश एके सीकरी ने उन्हें लंदन स्थित राष्ट्रमंडल सचिवालय पंचाट ट्रिब्यूनल (सीएसएटी) में भेजे जाने के केंद्र के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है. उन्होंने अपना नाम वापस लिए जाने के अनुरोध के साथ कानून मंत्रालय को पत्र लिखा है. उनके इस कदम को सीबीआई के पूर्व निदेशक आलोक वर्मा के मामले से जोड़ कर देखा जा रहा है.

जस्टिस एके सीकरी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली उस चयन समिति के सदस्य थे जिसने 2:1 के बहुमत से आलोक वर्मा को सीबीआई के निदेशक पद से हटाने का फैसला किया था. इसके बाद खबरें आई थीं कि एक महीना पहले सरकार ने उन्हें सीएसएटी में अंशकालिक जिम्मेदारी निभाने का प्रस्ताव दिया था. लेकिन अब उन्होंने इस प्रस्ताव को आलोक वर्मा के मामले से जोड़े जाने के कारण अस्वीकार कर दिया है. इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक अपने पत्र में जस्टिस सीकरी ने इन दो अलग-अलग मामलों को आपस में जोड़े जाने को लेकर ‘दुख जताया’ है.

उधर, सूत्रों का कहना है कि जस्टिस एके सीकरी के इस कदम ने सरकार को हैरान कर दिया है. उन्होंने बताया कि सरकार ने दिसंबर के पहले हफ्ते में ही सीएसएटी को लेकर जस्टिस सीकरी की सहमति ले ली थी, जबकि आलोक वर्मा का भविष्य तय करने के लिए बनाई गई चयन समिति में उन्हें करीब एक महीने बाद नामित किया गया. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने जस्टिस सीकरी को नामित किया था.