उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के गठबंधन के बारे में कहा जा रहा है कि यह भारतीय जनता पार्टी का सिरदर्द बढ़ाएगा. अलबत्ता अभी तो यह गठबंधन सपा प्रमुख अखिलेश यादव की तक़लीफ़ बढ़ाने के संकेत दे रहा है. ख़बरों के मुताबिक गठबंधन के विराेध में पहली आवाज़ अखिलेख यादव की सपा से ही उठी है. शिकोहाबाद सीट से पार्टी विधायक हरिओम यादव ने कहा है, ‘दोनों पार्टियों का गठबंधन तभी सफल हो सकता है जब हमारे अध्यक्ष (अखिलेश) बहनजी (मायावती) के सामने घुटने टेक दें.’

हरिओम यादव ने कहा, ‘गठबंधन चलाने के लिए हमारे अध्यक्ष को बहन जी की सभी मांगें माननी हाेंगी. तिस पर भी फ़िरोज़ाबाद में तो यह गठबंधन बिल्कुल बेअसर साबित होगा.’ जानकारों के मानें तो असंतोष की आवाज़ें अभी और भी सुनाई दे सकती हैं. इसकी वज़ह ये है कि उत्तर प्रदेश की दोनों प्रमुख पार्टियों ने आपसी सहमति से 38-38 लोक सभा सीटों पर ही चुनाव लड़ने का ऐलान किया है. राज्य की कुल 80 में से बाकी सीटें उन्होंने सहयोगी दलों के लिए छोड़ी हैं. इससे टिकट के कई दावेदारों में स्वाभाविक असंतोष है.

हालांकि इसके बावज़ूद सपा-बसपा अपने गठबंधन को और मज़बूती देने की दिशा में आगे बढ़ती दिख रही हैं. इसी के तहत राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता तेजस्वी यादव ने बसपा प्रमुख मायावती से मुलाकात की है. इस मुलाकात के बाद उन्होंने मायावती की प्रधानमंत्री पद की दावेदारी का भी समर्थन किया. इसके बाद अटकलें हैं कि सपा-बसपा बिहार में आरजेडी के नेतृत्व वाले महागठबंधन का हिस्सा हो सकती है. यहां यह याद रखा जा सकता है कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव और तेजस्वी आपस में रिश्तेदार भी हैं.