दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में भारत विरोधी नारे लगाए जाने के मामले में पुलिस ने करीब तीन साल बाद चार्जशीट दाखिल कर दी है. 1200 पन्नों की इस चार्जशीट में छात्र संघ के तत्कालीन अध्यक्ष कन्हैया कुमार सहित 10 को मुख्य आरोपित बनाया गया है. इस खबर को आज के अधिकतर अखबारों ने पहले पन्ने पर जगह दी है. बताया जाता है कि दिल्ली पुलिस ने यह चार्जशीट वीडियो-मोबाइल फुटेज, फेसबुक पोस्ट, बैनर और पोस्टर के अलावा मौके पर मौजूद लोगों के बयानों के आधार पर तैयार की है. इन आरोपितों के खिलाफ राजद्रोह, दंगा भड़काने, साजिश रचने और अवैध तरीके से एक जगह जमा होने जैसी धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं.

भाजपा के कार्यकर्ता अपने 60 फीसदी सांसदों से नाराज

अगले आम चुनाव में विपक्षी एकजुटता के साथ-साथ भाजपा को अपने कार्यकर्ताओं की नाराजगी से भी जूझना पड़ सकता है. हिन्दुस्तान की रिपोर्ट की मानें तो पार्टी के 60 फीसदी सांसदों से उनके कार्यकर्ता नाराज बताए जा रहे हैं. माना जा रहा है कि इस नाराजगी को दूर करने के लिए पार्टी नेतृत्व कई सांसदों के टिकट काट सकती है. हालांकि, इनमें कई वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री शामिल हैं, जिसके चलते कार्यकर्ताओं की इस नाराजगी को पूरी तरह दूर करना पार्टी के लिए टेढ़ी खीर साबित हो सकता है. अखबार ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में चुनिंदा कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया था. इस बारे में संगठन से जुड़े एक वरिष्ठ नेता ने बताया है कि जिन क्षेत्रों से नकारात्मक रिपोर्ट मिल रही है, वहां पर उम्मीदवार बदलने पर विचार किया जाएगा.

बुलंदशहर गोकशी मामला : जमानत मिलने से रोकने के लिए तीन आरोपितों पर रासुका लगाया गया

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में कथित गोकशी मामले में आरोपितों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) लगाने पर जिला मजिस्ट्रेट अनुज झा ने सफाई दी है. नवभारत टाइम्स की खबर के मुताबिक उन्होंने कहा है कि आरोपितों को जमानत मिलने से रोकने के लिए ऐसा किया गया है. इस बारे में अनुज झा का कहना है, ‘तीन आरोपितों ने जमानत के लिए आवेदन किया था और उन्हें जमानत मिलने की संभावना थी.’ झा ने आगे कहा कि लोक व्यवस्था और शांति की स्थिति बनाए रखने के लिए रासुका के तहत मामला दर्ज किया गया है. जिला मजिस्ट्रेट का यह भी कहना है कि आरोपितों के खिलाफ यह कदम पुलिस रिपोर्ट के आधार पर उठाया गया है. इससे पहले कथित गोकशी के मामले में सात लोगों को गिरफ्तार किया गया था. इनमें से तीन को रासुका के तहत नामजद किया गया है.

मोदी सरकार पर सोची-समझी नीति के तहत मनरेगा को खत्म करने का आरोप

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर दुनिया की सबसे बड़ी रोजगार गारंटी योजना मनरेगा को सोची-समझी नीति के तहत खत्म करने का आरोप लगा है. अमर उजाला की खबर के मुताबिक 90 सांसदों के साथ 250 बुद्धिजीवियों ने इस बारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है. इस पत्र में प्रधानमंत्री से इस योजना को मजबूत बनाने और ग्रामीण इलाकों के वर्तमान संकट से निपटने के उपायों में शामिल करने की अपील की है. बताया जाता है कि मनरेगा के लिए साल 2018-19 के बजट में जितनी रकम का प्रावधान किया गया था, उसका 99 फीसदी हिस्सा दिसंबर, 2018 में ही खत्म हो चुका है. इसकी वजह से इस वित्तीय वर्ष के बाकी वक्त के लिए आवंटित राशि का केवल एक फीसदी हिस्सा बचा है जिसके चलते योजना खत्म होने के कगार पर पहुंच गई है.