मंगलवार को मकर संक्रांति स्नान के साथ ही उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में अर्द्धकुंभ की शुरुआत हो गई. इस खबर को आज के अधिकतर अखबारों ने तस्वीरों के साथ पहले पन्ने पर जगह दी है. बताया जाता है कि पहले दिन ही करीब दो करोड़ लोगों ने संगम में डुबकी लगाई. इसमें केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी भी शामिल थीं. बताया जाता है कि इस आयोजन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित सत्ता पक्ष और विपक्ष के अन्य बड़े नेता भी शामिल हो सकते हैं. इस विशाल आयोजन का समापन चार मार्च, 2019 को महाशिवरात्रि के स्नान के बाद होना है.

सीएजी ने रफाल सौदे की ऑडिट रिपोर्ट देने से इनकार किया

नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने लड़ाकू विमान रफाल सौदे की ऑडिट रिपोर्ट देने से इनकार कर दिया है. सीएजी का कहना है कि ऑडिट की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है. साथ ही, इसका खुलासा करने से संसदीय विशेषाधिकार का भी हनन होगा. हिन्दुस्तान में छपी खबर के मुताबिक सीएजी से इसकी जानकारी आरटीआई के एक आवेदन में मांगी गई थी. वहीं, संवैधानिक प्रावधानों की मानें तो सीएजी अपनी ऑडिट रिपोर्ट संसद की लोक लेखा समिति को सौंपती है. इस रिपोर्ट को समिति बिना किसी संशोधन के संसद के सामने पेश करती है. दूसरी ओर, रफाल की खरीद में मोदी सरकार पर कथित घोटाले के आरोपों के बीच 60 पूर्व नौकरशाहों ने सीएजी पर जानबूझकर रफाल पर ऑडिट रिपोर्ट तैयार करने में देरी का आरोप लगाया है.

दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश ने कॉलेजियम की सिफारिश के खिलाफ राष्ट्रपति को पत्र लिखा

सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश के पद पर नियुक्ति को लेकर एक बार फिर विवाद घिरता जा रहा है. नवभारत टाइम्स की खबर के मुताबिक दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश कैलाश गंभीर ने दो न्यायाधीशों को सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त करने की सिफारिश का विरोध किया है. मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई सहित पांच न्यायाधीशों की कॉलेजियम ने दो न्यायाधीशों, संजीव खन्ना और दिनेश माहेश्वरी को सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त करने की सिफारिश की है. वहीं, पूर्व न्यायाधीश कैलाश गंभीर ने इस सिफारिश का विरोध करते हुए राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद को पत्र लिखा है. इसमें उन्होंने दोनों न्यायाधीशों की नियुक्ति को गलत बताते हुए न्यायाधीश खन्ना की पदोन्नति का खास तौर पर विरोध किया है. उन्होंने कहा है कि दिल्ली हाई कोर्ट के तीन न्यायाधीश जस्टिस खन्ना से वरिष्ठ हैं, इस स्थिति में उन्हें सुप्रीम कोर्ट भेजा जाना गलत परंपरा की शुरुआत होगी.

गुजरात के बाद झारखंड में सामान्य आरक्षण लागू, उत्तराखंड में भी लागू करने की तैयारी

गुजरात के बाद झारखंड ने भी सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में सामान्य आरक्षण को लागू करने का एलान कर दिया है. अमर उजाला में छपी खबर के मुताबिक राज्य में सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए 10 फीसदी कोटा तय किया गया है. इस बारे में मुख्यमंत्री रघुबर दास ने कहा है कि यह फैसला ‘सबका साथ और सबका विकास’ नारे को बुलंद करता है. वहीं, झारखंड के बाद अब उत्तराखंड सरकार भी इसे लागू करने की तैयारी में है. मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह ने कार्मिक विभाग को कैबिनेट की अगली बैठक में आर्थिक आरक्षण से संबंधित प्रस्ताव लाने का निर्देश दिया है.