आम आदमी पार्टी (आप) को बुधवार के दिन दोहरा झटका लगा. यह झटका उसे दिल्ली और पंजाब में लगा जबकि इन्हीं राज्यों में पार्टी को अगले लोक सभा चुनाव के लिहाज़ से सबसे ज़्यादा संभावनाएं नज़र आ रही हैं. दिल्ली में उसकी एकतरफा बहुमत के साथ सरकार है जबकि पंजाब में भी उसके विधायकों और सांसदों की उपस्थिति है.

ख़बरों के मुताबिक पंजाब से आप के विधायक बलदेव सिंह ने पार्टी की सदस्यता और विधायकी दोनों छोड़ दी है. उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर ‘अहंकारी और तानाशाही रवैया अपनाने’ का आरोप लगाया है. इन आरोपों के साथ उन्होंने पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल को अपना इस्तीफ़ा भेज दिया है. वे जैतो विधानसभा सीट से चुने गए थे. इससे पहले इसी तरह के आरोपों के साथ आप विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने भी छह जनवरी को पार्टी और विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफ़ा दे दिया था. वकील और सामाजिक कार्यकर्ता एचएस फूल्का भी पार्टी छोड़ चुके हैं. उन्होंने विधानसभा की सदस्यता भी छोड़ दी थी. वे दाखा से आप के टिकट पर चुने गए थे.

इधर, दिल्ली में कांग्रेस की नवनियुक्त अध्यक्ष शीला दीक्षित ने आप के साथ लोक सभा चुनाव में गठबंधन की संभावनाओं को सिरे से ख़ारिज़ कर दिया है. दीक्षित ने कहा, ‘उन्होंने (आप ने) विधानसभा में राजीव गांधी के बारे में जिस तरह से बात की उससे हम बेहद आहत हैं. वह तरीका सही नहीं था.’ इसके बाद आप के साथ गठबंधन की संभावना से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा, ‘इस पर उनसे (आप से) कोई बात नहीं हो रही है. हमारे लिए आप और भाजपा एक जैसी चुनौतियां हैं. उनसे हम एक साथ निपट लेंगे.’

हाल में दिल्ली विधानसभा में 1984 के सिख दंगों के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उनसे भारत रत्न वापस लेने की मांग संबंधी प्रस्ताव कथित तौर पर पारित किया गया था. बाद में विवाद होने पर इसे वापस ले लिया गया.