तमाम विवादों के बीच राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बुधवार को जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और संजीव खन्ना को सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत किए जाने को लेकर अपनी सहमति दे दी. इन नई नियुक्तियों के साथ ही सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़कर 28 हो गई है. द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने बीते हफ्ते ही इन दोनों जजों को शीर्ष अदालत में पदोन्नत करने संबंधी सिफारिश की थी.

कॉलेजियम की इस सिफारिश के साथ ही जजों के नामों को लेकर सवाल भी उठने शुरू हो गए थे. क्योंकि, बीते साल दिसंबर में कॉलेजियम ने राजस्थान हाईकोर्ट के जस्टिस प्रदीप नंदराजोग व दिल्ली हाईकोर्ट के जज राजेंद्र मेनन को सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत किए जाने की सिफारिश की थी. वहीं बीते हफ्ते कॉलेजियम ने पिछले फैसले को बदलते हुए नए नामों को आगे बढ़ाने का निर्णय किया था.

कॉलेजियम के इस फैसले पर हाईकोर्ट के पूर्व जज कैलाश गंभीर ने भी सवाल उठाए थे. साथ ही उन्होंने इस बाबत राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को एक भी पत्र लिखा था. इसमें उन्होंने इन दोनों जजों की वरिष्ठता पर सवाल उठाए थे. साथ ही कॉलेजियम के फैसले को उन्होंने 32 जजों की अनदेखी किए जाने वाली ‘ऐतिहासिक भूल’ भी कहा था.

अगर अखिल भारतीय स्तर पर हाईकोर्ट के जजों की संयुक्त वरिष्ठता के लिहाज से देखें तो दिनेश माहेश्वरी 21वें जबकि संजीव खन्ना इसमें 33वें स्थान पर थे. हालांकि इनके नामों की सिफारिश करते हुए कॉलेजियम ने इन्हें हाईकोर्ट के अन्य चीफ जस्टिसों व जजों के मुकाबले अधिक योग्य व उपयुक्त बताया था.

खबरों के मुताबिक प्रदीप नंदराजोग और राजेंद्र मेनन के नामों के बजाय दिनेश माहेश्वरी और संजीव खन्ना के नामों की सिफारिश किए जाने पर कुछ अन्य जजों ने भी नाराजगी जाहिर की थी. इनका कहना था कि कॉलेजियम के फैसले में व्यक्तिगत पसंद जैसा कोई संकेत नहीं जाना चाहिए.