अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) वर्ग को तय आरक्षण के तहत नौकरी देने के मामले में सरकारी बैंक व उपक्रम केंद्रीय विभागों और विश्वविद्यालयों से बेहतर हैं. इंडियन एक्सप्रेस ने सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत मिली जानकारी के आधार पर यह खबर दी है.

अखबार के मुताबिक देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक द स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) ने अपने यहां अधिकारी स्तर की नौकरियों में एससी-एसटी कोटा पूरा किया है. वहीं, सरकारी उपक्रमों की बात करें तो एल्युमिनियम कंपनी नाल्को ने अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण तय कोटे (7.5 प्रतिशत) से लगभग दोगुना रखा है. हालांकि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) ओबीसी कोटे के तहत अधिकारी स्तर की नौकरियां देने के मामले में पीछे नजर आते हैं.

खबर के मुताबिक 13 बड़े सरकारी बैंकों में एससी अधिकारियों की संख्या तय कोटे से ज्यादा है. उधर, इनमें ओबीसी के लिए आरक्षित 27 प्रतिशत कोटे में से 20.75 नौकरियां दी गई हैं. यहां कोटा पूरा नहीं हो पाया है, लेकिन यह केंद्र सरकार के 71 विभागों से बेहतर है जहां केवल 14.94 प्रतिशत कोटा दिया गया है. इसके अलावा आरबीआई की बात करें तो इसके 6,908 अधिकारियों में से केवल 13.81 प्रतिशत ओबीसी से आते हैं जबकि 14.93 और 6.31 प्रतिशत अधिकारी (क्रमशः) एससी और एसटी हैं.

कुछ बैंकों ने ओबीसी उम्मीदवारों को नौकरी देने में अच्छा प्रदर्शन किया है. अखबार के मुताबिक चेन्नई स्थित इंडियन बैंक (आईबी) और इंडियन ओवरसीज बैंक (आईओबी) इनमें शामिल हैं. आईबी के 11,098 अधिकारियों में से 29.05 प्रतिशत ओबीसी हैं, और आईओबी के 14,522 अधिकारियों में से 26.35 प्रतिशत ओबीसी कोटे के हैं. वहीं, कर्नाटक मणिपाल स्थित सिंडिकेट बैंक के 8,591 अधिकारियों में से 25.28 प्रतिशत अधिकारी ओबीसी से आते हैं.

बैंकों के अलावा जिन सरकारी कंपनियों ने आरटीआई का जवाब दिया, उनमें भुवनेश्वर स्थित नाल्को ने बताया कि उसके यहां अनुसूचित जनजाति का प्रतिशत 16.67 है. लेकिन कंपनी ओबीसी को नौकरी देने के मामले में पिछड़ती (केवल 8.81 प्रतिशत) दिखती है. एलआईसी भी ओबीसी कोटे के तहत नौकरी देने में पीछे नजर आती है. रिपोर्ट के मुताबिक इसमें पहली और दूसरी श्रेणी के कर्मचरियों की संख्या 55,633 है. इनमें से केवल 9.41 प्रतिशत ओबीसी कोटे से आते हैं. सरकारी निर्माण कंपनी एनबीसीसी में एसटी कोटा कम (4.77 प्रतिशत है), लेकिन ओबीसी कोटा नाल्को और एलआईसी के मुकाबले बेहतर (17.77 प्रतिशत) है.

इससे पहले बुधवार को अखबार ने रिपोर्ट दी थी कि केंद्र सरकार की पहली और दूसरे स्तर की नौकरियों में एससी, एसटी और ओबीसी समाज के लोगों का नेतृत्व काफी कम है. अखबार के मुताबिक केंद्रीय विश्वविद्यालयों में ओबीसी से एक भी प्रोफेसर या एसोसिएट प्रोफेसर नहीं है. बता दें कि विश्वविद्यालयों में ओबीसी के लिए आरक्षण केवल एसोसिएट प्रोफेसर के पद के लिए है.