केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार भले ही नौकरी के करोड़ों अवसर पैदा करने का दावा कर रही हो, लेकिन आंकड़े उसके दावों और इस मामले में उसके अपने प्रदर्शन पर सवाल खड़ा कर रहे हैं. टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक मार्च 2014 के बाद से खुद केंद्र सरकार की नौकरियों में कमी आई है. अखबार ने बताया कि सरकार ने 2018-19 के केंद्रीय बजट में केंद्रीय स्टाफ की जो संख्या बताई वह मार्च 2014 के मुकाबले 75,231 कम है.

सरकार हर साल चालू वर्ष के लिए केंद्रीय कर्मियों की संख्या की घोषणा करती है. खबर के मुताबिक 2018-19 के बजट में सरकार ने अपने सभी 55 मंत्रालयों व विभागों में काम करने वालों की संख्या (रेलवे को मिलाकर और रक्षा क्षेत्र को छोड़ कर) 32.52 लाख बताई थी, जबकि एक मार्च, 2014 में यह संख्या 33.3 लाख थी. सरकार ने इस (कम हुई संख्या) में वृद्धि करने की घोषणा करते हुए 2018-19 में केंद्रीय कर्मियों की संख्या 35 लाख तक किए जाने की बात कही थी.

पिछले चार सालों से सरकार कह रही है कि अतिरिक्त श्रमशक्ति के तहत वह हर साल दो लाख नई भर्तियां करेगी. लेकिन सच यह है कि ऐसा होने के बजाय उलटा पहले से मौजूद श्रमशक्ति में कमी आई है. खबर के मुताबिक इसका एक कारण तो यह हो सकता है कि सरकार कॉन्ट्रैक्ट वाली भर्तियों को तरजीह दे रही है. इसके अलावा रिटायर होने वाले कर्मचारियों की जगह लेने के लिए कई सालों से भर्तियां नहीं हुई हैं, जिसके चलते पद खाली पड़े हैं. इस मामले में रेलवे का हाल सबसे खराब है. एक मार्च, 2016 को उसके कर्मचारियों की संख्या 13.31 लाख थी. यह मार्च 2017 में घट कर 13.08 हो गई. वहीं, पिछले बजट में सरकार ने ऐसी कोई घोषणा नहीं कि वह रेलवे स्टाफ में बढ़ोतरी करेगी.

ऐसे सवाल में उठता है कि आखिर दो से ढाई लाख तक की अतिरिक्त श्रमशक्ति कहां से आ रही है? रिपोर्ट के मुताबिक इसे लेकर सरकार का अनुमान है कि पुलिस बलों (अर्धसैनिक बल) में हुई भर्तियों के चलते यह बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. अनुमान के मुताबिक यह संख्या 10.24 लाख से 11.25 लाख हो सकती है. वहीं, प्रत्यक्ष कर विभाग के कर्मचारियों की संख्या 45,000 से 80,000 हो सकती है. इसके अलावा अप्रत्यक्ष कर विभाग के कर्मचारी भी 54,000 से बढ़ कर 93,000 हो सकते हैं. इस सूची में सूचना व प्रसारण मंत्रालय व विदेश मंत्रालय समेत अन्य विभाग भी शामिल हैं.