भाजपा विरोधी दलों ने शनिवार को पश्चिम बंगाल के कोलकाता में ‘यूनाइटेड इंडिया रैली’ के जरिये अपनी एकजुटता का प्रदर्शन किया है. साथ ही एक मंच पर आकर इन दलों के नेताओं ने एक सुर में ‘लोकतंत्र की रक्षा’ और भाजपा को केंद्र की सत्ता से हटाने का संदेश भी दिया. द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों और विभिन्न दलों के नेताओं सहित भाजपा के बागी नेता शत्रुघ्न सिन्हा भी इस रैली में शामिल हुए. वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस रैली में अपनी पार्टी का प्रतिनिधित्व किया.
भाजपा के बागी नेता शत्रुघ्न सिन्हा ने इस मौके पर अपनी ही पार्टी पर निशाना साधा. उन्होंने कहा, ‘लोग अक्सर मुझसे पूछते हैं कि मैं भाजपा के खिलाफ क्यों बोलता हूं? क्या मैं बागी हूं? तो मैं उनसे कहता हूं कि अगर सच कहना बगावत है तो मैं बागी हूं. मैं सच के साथ हूं, मैं सिद्धांतों के साथ समझौता नहीं कर सकता.’ उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगर रफाल विमान सौदे पर पूछे सवालों का जवाब नहीं देते तो हमें यह सुनने को मिलता रहेगा कि ‘चौकीदार चोर है.’
वहीं भाजपा की पूर्व केंद्र सरकार में वित्त मंत्री रहे यशवंत सिन्हा ने कहा, ‘यह रैली किसी एक व्यक्ति को चुनाव में हराने या उसे सत्ता से बाहर करने के लिए नहीं बुलाई गई है. इस रैली का उद्देश्य एक विचारधारा को पराजित करना है. भाजपा की मौजूदा सरकार ने देश के संस्थानों को तबाह किया है.’ सिन्हा ने भाजपा की मौजूदा सरकार पर समाज को बांटने का आरोप भी लगाया. वहीं भाजपा के पूर्व नेता अरुण शौरी ने कहा, ‘विपक्षी दलों का सिर्फ एक उद्देश्य, भाजपा को केंद्र की सत्ता से बेदखल करना है.’
इस मौके पर मल्लिकार्जुन खड़गे का कहना था कि भाजपा शासन में आम आदमी बेचैन है. केंद्र सरकार ने सरकारी संस्थाओं को दुर्बल किया है. उनके मुताबिक, ‘देश के संविधान को तहस-नहस करने में जुटी ताकतों को अगले आम चुनाव में हराना आवश्यक है.’ वहीं पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा ने कहा, ‘भाजपा विरोधी दलों को आपसी मतभेद भुलाने की जरूरत है. हमारी एकजुटता भाजपा की हार का कारण बनेगी.’
नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारुख अब्दुल्ला ने कहा, ‘अगर हम देश को बचाने की चाह रखते हैं तो हम सभी को कुछ न कुछ कुर्बानी जरूर देनी होगी.’ इस मौके पर उन्होंने कश्मीर के ताजा हाल की तरफ इशारा करते हुए आगे कहा, ‘मैं एक मुसलमान हूं. लेकिन हिंदुस्तानी भी हूं.’ उनके मुताबिक हर कश्मीरी भारत में रहना चाहता है. उन्होंने आगामी आम चुनाव ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर से कराए जाने की मांग भी की.
इधर, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि कोलकाता की इस रैली से उठी आवाज की गूंज पूरे देश में सुनाई देगी. उन्होंने आगे कहा, ‘मोदी जी ने वादा तो सबका साथ सबका विकास करने का दिया था लेकिन उनकी कोशिश समाज में जहर घोलने की रही है.’ वहीं बसपा नेता एससी मिश्रा ने भाजपा सरकार पर किसानों व दलितों के हितों की अनदेखी करने के आरोप लगाए.
डीएमके नेता एमके स्टालिन ने भाजपा को विभाजनकारी नीतियों पर चलने वाली पार्टी बताया. वहीं, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 2019 के लोकसभा चुनाव को मोदी-शाह की जोड़ी को केंद्र से हटाने का चुनाव बताया. कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने कहा कि भारतीय संस्कृति ‘एकता में अनेकता’ की रही है. लेकिन भाजपा ने यह परंपरा खत्म करने की कोशिश की है. ऐसे में उसकी सरकार को केंद्र से उखाड़ फेंके जाने की जरूरत है.
इस रैली में शामिल हुए तेलुगुदेशम पार्टी के अध्यक्ष और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू का कहना था, ‘नरेंद्र मोदी आत्ममुग्ध प्रधानमंत्री हैं. लेकिन देश को प्रदर्शन करने वाले प्रधानमंत्री की जरूरत है. मोदी ने सुशासन, स्मार्ट सिटी, काला धन वापस लाने जैसी चीजों को लेकर सिर्फ बातें की हैं. इन पर अमल नहीं किया. ऐसे के प्रधानमंत्री को बदलकर हमें देश में बदलाव लाने की जरूरत है.’
इधर, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का कहना था कि भाजपा चाहे जितना दावा कर ले, उसके शासन में ‘अच्छे दिन’ आने वाले नहीं हैं. 2014 में लोगों ने भाजपा को सत्ता की बागडोर सौंपी. लेकिन इस पार्टी ने वह मौका गंवा दिया है. ममता बनर्जी के मुताबिक, ‘भाजपा के खिलाफ 23 पार्टियां हैं. हम चाहेंगे कि इस संख्या में और इजाफा हो. जो भाजपा के साथ नहीं हैं वह हमारे साथ आए ताकि आगामी चुनाव में भाजपा को केंद्र की सत्ता से हटाया जा सके.’
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