जाट समाज के नेताओं ने अपने आरक्षण की मांग पूरी न होने तक भाजपा को हराने का आह्वान किया है. रविवार को अखिल भारतीय जाट आरक्षण बचाओ महाआंदोलन (एआईजेएबीएम) के बैनर तले इकट्ठे हुए इन नेताओं ने कहा कि उनके कोटे की मांग को स्वीकार न कर सरकार ने उन्हें धोखा दिया है, जबकि सामान्य वर्ग के लिए सरकार ने ‘सात दिन के अंदर’ आरक्षण दे दिया. कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के जाट नेताओं ने कहा कि उनके समाज के लोग इस बार लोकसभा चुनाव में मायावती को वोट देंगे. उनके मुताबिक मायावती एक मात्र नेता हैं जिन्होंने जाट आरक्षण का समर्थन किया था और 2016 की हिंसा के दौरान जाटों के खिलाफ की गई कार्रवाई को लेकर सरकार की आलोचना की थी.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक रैली में शामिल हुए एआईजेएबीएम के प्रमुख समन्वयक धरमवीर चौधरी ने कहा, ‘यूपीए सरकार ने केंद्रीय नौकरियों में हमें आरक्षण दिया था. लेकिन जब इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई तो मौजूदा एनडीए सरकार ने जानबूझकर इस पर ठीक से बहस नहीं की और (पिछली) सरकार का आदेश अमान्य हो गया. तब से नरेंद्र मोदी सरकार हमें केवल आश्वासन दे रही है. मैं सरकार को चेतावनी देता हूं कि जाटों से अब और चालाकी नहीं चलेगी. हम भाजपा को हराने के लिए जाट बहुल्य वाले 131 चुनाव क्षेत्रों में कैंपेन करेंगे.’

धरमवीर ने कहा कि उनके संगठन ने अपने समुदाय से कहा है कि वे अपने सांसदों का ‘जूतों से स्वागत’ करें, क्योंकि वे संसद में जाट आरक्षण का मुद्दा उठाने में नाकाम रहे. उनके मुताबिक केंद्र ने जाट आरक्षण को लेकर 2015 में वेंकैया नायडू की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया था, लेकिन इस समिति की आज तक कोई बैठक नहीं हुई है. उधर, जाट नेताओं का कहना है कि इस मुद्दे को लेकर वे कई बार प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से मिले हैं. उनके मुताबिक दोनों नेताओं ने समुदाय को आरक्षण देने का वादा किया, लेकिन पार्टी ने कभी अपना वादा नहीं निभाया.