सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने कहा है कि अगर सरकार ने लोकपाल की नियुक्ति की होती तो रफाल सौदे में ‘घोटाला’ नहीं हुआ होता. स्क्रोल डॉट इन के मुताबिक सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने यह भी कहा, ‘मुझे रफाल विमान सौदे से जुड़े कई कागजात मिले हैं. इनका अवलोकन करके दो दिन बाद मैं फिर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करूंगा.’ इसके साथ उन्होंने भी इस सौदे में रिलायंस डिफेंस को साझेदार बनाए जाने पर सवाल उठाए हैं.

अन्ना हजारे ने आगे कहा कि देश में भ्रष्टाचार निरोधक कानून को लागू करने में देर हो रही है. इसके विरोध में वे आगामी 30 जनवरी से महाराष्ट्र में अपने गांव रालेगण सिद्धी में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करेंगे. यह हड़ताल मांग पूरी होने तक जारी रहेगी. इसके साथ ही उन्होंने अपने समर्थकों से रालेगण सिद्धी में इकट्ठा होने के बजाय अपने शहरों में ही भूख हड़ताल करने की अपील भी की है.

अन्ना हजारे को लोकपाल आंदोलन के प्रमुख चेहरे के तौर पर पहचाना जाता है. बीते आठ सालों के दौरान लोकपाल को लेकर यह उनकी तीसरी भूख हड़ताल होगी. इससे पहले 2011 में उन्होंने लोकपाल के लिए 12 दिनों का अनशन किया था. उसके बाद कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार ने संसद में लोकपाल विधेयक पेश किया था. उसपर तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने जनवरी 2014 में अपनी सहमति दी थी. हालांकि उसके बाद से भी अब तक लोकपाल की नियुक्ति नहीं हो पाई है.