इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) की सुरक्षा का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है. सोमवार को एक कथित साइबर विशेषज्ञ सैयद शुजा ने लंदन में दावा किया है कि 2014 के आम चुनाव में ईवीएम हैक करके नतीजों में धांधली की गई थी. इस खबर को आज के अधिकतर अखबारों ने पहले पन्ने पर जगह दी है. शुजा के मुताबिक उन्होंने 2009 से 2014 के बीच इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया में काम किया था. इस दौरान उन्हें अप्रैल, 2014 में पता चला था कि ईवीएम मशीनों द्वारा कुछ सिग्नल प्रसारित हो रहे थे और इनके जरिए भाजपा ने वोटिंग मशीनों को हैक किया था. वहीं, शुजा के इस दावे को चुनाव आयोग ने खारिज कर दिया है. साथ ही, आयोग ने सैयद शुजा के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की बात भी कही है.

गरीब सवर्णों को आरक्षण के खिलाफ डीएमके की याचिका पर मद्रास हाईकोर्ट का केंद्र को नोटिस

आर्थिक रूप से पिछड़े सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण देने को लेकर मद्रास हाई कोर्ट ने केंद्र से जवाब तलब किया है. द स्टेट्समैन के मुताबिक तमिलनाडु की मुख्य विपक्षी पार्टी डीएमके ने इसके खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया था. केंद्र के इस कदम को गैरकानूनी बताते हुए उसका कहना है कि आरक्षण का मकसद गरीबी उन्मूलन नहीं बल्कि सदियों से सताए गए समुदायों को सामाजिक न्याय देना था. उधर, सरकार ने दलील दी है कि डीएमके की विचारधारा कुछ खास समुदायों का विरोध करती है और इसलिए यह याचिका राजनीति से प्रेरित है. हालांकि अदालत ने इसे खारिज कर दिया और सरकार को 18 फरवरी तक जवाब देने को कहा.

दिल्ली हाई कोर्ट ने पहलवान नरसिंह यादव की शिकायत पर ढाई साल बाद भी कार्रवाई न करने पर सीबीआई को फटकार लगाई

दिल्ली हाई कोर्ट ने पहलवान नरसिंह यादव की ढाई साल से पहले की गई शिकायत की जांच पूरी न करने पर सीबीआई को फटकार लगाई है. अदालत ने जांच एजेंसी से पूछा है कि इतने वक्त में कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई. नवभारत टाइम्स की खबर के मुताबिक हाई कोर्ट ने डीआईजी स्तर के अधिकारी द्वारा इस मामले को देखने का निर्देश दिया है. साथ ही, इसकी रिपोर्ट भी पेश करने को कहा है. इससे पहले नरसिंह यादव ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि उनके भोजन में प्रतिबंधित पदार्थ मिलाए गए थे. इस वजह से उन पर डोपिंग के आरोप में चार साल का प्रतिबंध लगाया गया.

इस साल सामान्य आरक्षण की वजह से शैक्षणिक संस्थानों में 10 फीसदी सीटें बढ़ाई जाएंगी

देश में सामान्य आरक्षण लागू होने के बाद शैक्षणिक संस्थानों में सीटों की संख्या में 25 फीसदी सीटें बढ़ाने की प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा. इसके तहत इस साल केवल 10 फीसदी सीटें बढ़ने का ही अनुमान है. हिन्दुस्तान में छपी खबर के मुताबिक मानव संसाधन विकास मंत्रालय के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा, ‘सीटें बढ़ाने के लिए न केवल शिक्षकों की भर्ती करनी होती है बल्कि, नई कक्षाओं और फर्नीचर की भी जरूरत पड़ती है. ऐसे में संस्थानों को एक बार में अपनी क्षमता 25 फीसदी बढ़ाना संभव नहीं होता है. साथ ही, उन्होंने साफ किया कि केंद्रीय उच्च शैक्षणिक संस्थानों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ का वहन केंद्र सरकार करेगी. वहीं, राज्य सरकारों के अधीन आने वाले संस्थाओं की वित्तीय जिम्मेदारी राज्य सरकारों को उठाना होगी.