हाल के कुछ वर्षों में जिन महान नेताओं की तस्वीरों के साथ सबसे ज़्यादा छेड़छाड़ की गई है, उनमें जवाहरलाल नेहरू का नाम सबसे पहले लिया जाए तो ग़लत नहीं होगा. देश के पहले प्रधानमंत्री हमेशा एक ख़ास तबक़े के निशाने पर रहे हैं. कभी उनकी तस्वीरों को एडिट कर ग़लत तरीक़े से पेश किया जाता है तो कभी कोई सही तस्वीर ग़लत जानकारी के साथ वायरल हो जाती है.

इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ है. जवाहरलाल नेहरू की एक दुर्लभ तस्वीर ग़लत जानकारी के साथ शेयर हो रही है. इस तस्वीर में नेहरू गंगा नदी के पानी में जनेऊ पहने हुए दिख रहे हैं. दावा है कि यह तस्वीर 1954 में आयोजित कुंभ मेले की है जिसमें शामिल होते हुए नेहरू ने ‘कुंभ स्नान’ किया था. वरिष्ठ पत्रकार और फ़िल्म निर्देशक विनोद कापड़ी के शेयर करने से यह तस्वीर और इसे लेकर किया गया दावा सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है. लेकिन क्या यह दावा सच है?

गूगल से जानकारी जुटाने पर जो तथ्य पता चलते हैं उनके मुताबिक 1954 में इलाहाबाद में कुंभ मेले का आयोजन किया गया था. लेकिन नेहरू ने उसमें कोई स्नान नहीं किया था. कई वेबसाइटों का दावा है कि यह वायरल तस्वीर 1954 के कुंभ की नहीं, बल्कि 1938 की है. उस साल 10 जनवरी को उनकी माताजी स्वरूप रानी का निधन हो गया था. जब नेहरू उनकी अस्थियां गंगा में विसर्जित कर रहे थे, उस समय यह तस्वीर ली गई थी. यानी सोशल मीडिया पर किया जा रहा दावा ग़लत है.

अब सवाल है कि क्या सच में यह तस्वीर 1954 के कुंभ की न होकर 1938 में स्वरूप रानी के निधन के समय की ही है? इसका जवाब जानने के लिए मार्च, 2006 में इंडिया टुडे में प्रकाशित एक किताब की समीक्षा देखी जा सकती है. इस किताब का नाम है - द नेहरूज़ : पर्सनल हिस्ट्री. एस प्रसन्नाराजन ने अपनी उस समीक्षा में कहा था कि यह किताब काफ़ी अच्छे शोध और दुर्लभ तस्वीरों के साथ लिखी गई है. उन्होंने किताब में ही छपी तस्वीरों को अपनी समीक्षा में शामिल किया था. नीचे उनकी समीक्षा का स्क्रीनशॉट देखा जा सकता है. इससे साफ़ होता है कि वायरल तस्वीर का सच नेहरू की माताजी के निधन से ही जुड़ा है.

स्क्रीनशॉट : इंडिया टुडे
स्क्रीनशॉट : इंडिया टुडे

(अगर आपके पास सोशल मीडिया के ज़रिए ऐसी कोई जानकारी (ख़बर, तस्वीर या वीडियो) आई है, जिसके सही होने पर आपको संदेह हो तो उसे हमें dushyant@satyagrah.com पर भेज दें. हम उसकी जांच कर सच सामने लाने का प्रयास करेंगे.)