राजस्थान के धौलपुर पैलेस को मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया के बेटे दुष्यंत सिंह की संपत्ति बताने वाले भारतीय जनता पार्टी के दावे को कांग्रेस पार्टी ने दोबारा चुनौती दी है. पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने इस संबंध में चार नये दस्तावेजों के जरिये दावा किया है कि यह संपत्ति राजस्थान सरकार की है. उन्होंने दुष्यंत सिंह पर धौलपुर पैलेस से लगी सरकारी जमीन पर सड़क बनाने के एवज में 'राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण' से दो करोड़ रुपये का मुआवजा लेने का भी आरोप लगाया है. इस पूरे प्रकरण को लेकर कांग्रेस ने वसुंधरा राजे से इस्तीफा देने की मांग की है और प्रधानमंत्री से सफाई मांगी है. दो दिन पहले भी कांग्रेस ने वसुंधरा राजे और ललित मोदी पर फर्जीवाड़ा करके धौलपुर पैलेस को कब्जा करने और उसे होटल बनाने का आरोप लगाया था. इस आरोप को बेबुनियाद बताते हुए भाजपा ने धौलपुर पैलेस को दुष्यंत सिंह की निजी संपत्ति करार दिया था. पार्टी नेताओं ने इसको लेकर कुछ दस्तावेज भी सार्वजनिक किए थे. इनके जवाब में कांग्रेस आज चार नये दस्तावेज लेकर आई है.
राजस्थान भाजपा के अध्यक्ष अशोक परनामी ने 1965 के एक दस्तावेज का हवाला देते हुए दावा किया है कि भारत सरकार ने धौलपुर पैलेस को महाराजा हेमंत सिंह के नाम कर दिया था
इन दस्तावेजों में 'नेशनल आर्काइव' में रखा हुआ अप्रैल 1949 का एक दस्तावेज भी है जिसके मुताबिक, धौलपुर पैलेस की मालिक राजस्थान सरकार है. इसमें लिखा है कि 'तत्‍कालीन महाराजा उदयभान सिंह (दुष्यंत सिंह के पिता हेमंत सिंह के नाना) के जीवित रहने तक यह पैलेस उनका रहेगा...' इसके अलावा बाकी तीन दस्तावेज दुष्यंत सिंह और उनके पिता के बीच हुए करारनामे, सीबीआई में उनके खिलाफ दर्ज की गई एक शिकायत और धौलपुर पैलेस से लगी सरकारी जमीन पर सड़क बनाने के एवज में दो करोड़ का मुआवजा लिये जाने से संबंधित हैं. कांग्रेस के इन दस्तावेजों के जवाब में भाजपा एक बार फिर से वसुंधरा और दुष्यंत सिंह का बचाव करने में जुट गई है. राजस्थान भाजपा के अध्यक्ष अशोक परनामी ने साल 1965 के एक दस्तावेज का हवाला देते हुए दावा किया है कि भारत सरकार ने धौलपुर पैलेस को महाराजा हेमंत सिंह के नाम कर दिया था, लिहाजा इसके सरकारी संपत्ति होने का सवाल ही नहीं उठता है.
'अति व्यस्त' प्रधानमंत्री से नहीं मिल सकेंगे केजरीवाल
पिछले दस दिनों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करने की कोशिश कर रहे दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की यह हसरत अगले कुछ और दिनों तक पूरी नहीं हो सकेगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'अति व्यस्तता' का हवाला देते हुए उनसे मिलने से इंकार कर दिया है. प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा है कि उनकी व्यस्तता के चलते फिलहाल दोनों की मुलाकात संभव नहीं है, और यदि बेहद जरूरी है तो केजरीवाल गृहमंत्री, या वित्त मंत्री से मिल सकते हैं. बताया जा रहा है कि उपराज्यपाल नजीब जंग और दिल्ली सरकार के बीच चल रहे टकराव के सिलसिले में केजरीवाल मोदी से मिलना चाहते थे. इसको लेकर वे राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, वित्तमंत्री अरुण जेटली और गृहमंत्री राजनाथ सिंह से भी मुलाकात कर चुके हैं. लेकिन इन तीनों के साथ हुई बातचीत के बाद भी इस टकराव का कोई समाधान नहीं निकल पाया है. प्रधानमंत्री के इस रवैये से नाराज आम आदमी पार्टी उन पर जानबूझ कर समय नहीं देने का आरोप लगा रही है. पार्टी नेताओं का कहना है कि उनके पास सेल्फी लेने से लेकर योग करने तक के लिए तो पूरा समय है, लेकिन एक बेहद अहम मसले पर बातचीत के लिए थोड़ा भी वक्त नहीं है.
जयललिता की रिकार्डतोड़ जीत, बाकी राज्यों में सत्ताधारी पार्टियों के प्रत्याशी जीते
तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे जयललिता ने दो दर्जन से ज्यादा प्रतिद्वंदियों की जमानत जब्त कराते हुए विधान सभा का उपचुनाव जीत लिया है. राज्य की आरके नगर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में उन्होंने डेढ लाख से ज्यादा मतों के अंतर से जीत हासिल की है. सितंबर 2014 में आय से अधिक संपत्ति रखने के आरोप में निचली अदालत द्वारा जयललिता को दोषी करार दिया गया था. इसके बाद उन्हें मुख्यमंत्री पद के साथ-साथ विधानसभा सदस्यता से भी हाथ धोना पड़ गया था. इसी साल मई में हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को निरस्त करते हुए उनकी सजा रद्द कर दी थी जिसके बाद वे फिर से मुख्यमंत्री बन गई हैं. मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद छह महीनों के अंदर जयललिता का विधानसभा सदस्य चुना जाना अनिवार्य था. तमिलनाडु के अलावा चार और राज्यों त्रिपुरा , मध्यप्रदेश, केरल और मेघालय की पांच विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के नतीजे भी आ गए हैं. इन चारों ही राज्यों में सत्ताधारी पार्टियों - सीपीआई-एम, भाजपा और कांग्रेस - के प्रत्याशी चुनाव जीतने में सफल रहे हैं.