सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस मदन बी लोकुर ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के एक फैसले को सार्वजनिक न किए जाने पर निराशा जताई है. स्क्रोल डॉट इन के मुताबिक उन्होंने कहा है, ‘बीते साल 12 दिसंबर को कॉलेजियम ने हाईकोर्ट के दो जजों को शीर्ष अदालत में पदोन्नत करने का फैसला किया था. लेकिन उसे सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर नहीं डाला गया. इससे मुझे निराशा हुई है.’ उन्होंने आगे कहा, ‘कॉलेजियम ने अपने ही पिछले फैसले को इस साल दस जनवरी को बदल दिया. ऐसा क्यों और किन दस्तावेजों के आधार पर हुआ इस बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है.’

हालांकि जस्टिस लोकुर ने कॉलेजियम में ‘भाई-भतीजावाद’ संबंधी दावों को खारिज भी किया है. उन्होंने कहा है, ‘कॉलेजियम की बैठकों में स्वस्थ चर्चा होती है. सहमति और असहमति इसका हिस्सा हैं. यहां जो कुछ होता है वह गोपनीय है. इस पर भरोसा किया जाना महत्वपूर्ण है. फिर भी इस व्यवस्था में कुछ बदलाव लाए जाने की जरूरत है.’

इससे पहले 12 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने प्रदीप नंदराजोग और राजेंद्र मेनन को शीर्ष अदालत में पदोन्नत करने का फैसला किया था. यह निर्णय करने वाले पांच सदस्यों वाले कॉलेजियम में जस्टिस मदन बी लोकुर भी शामिल थे. इस बीच 30 दिसंबर को जस्टिस लोकुर सुप्रीम कोर्ट से सेवानिवृत्त हो गए थे. इसके बाद कॉलेजियम ने इसी महीने की दस तारीख को एक और बैठक की. उस बैठक में कॉलेजियम ने पूर्व में तय किए नामों के बजाय जस्टिस संजीव खन्ना और दिनेश माहेश्वरी को शीर्ष अदालत में पदोन्नत करने की सिफारिश की थी.