भारतीय मूल की अमेरिकी सीनेटर कमला हैरिस ने अगले साल होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के लिए अपनी दावेदारी की घोषणा कर दी है. अमेरिका में ‘फीमेल ओबामा’ के नाम से जानी जाने वाली 54 वर्षीय कमला हैरिस ने 2016 में कैलिफोर्निया से सीनेट का चुनाव जीता था. ऐसा करके वे अमेरिका में अब तक की दूसरी और पिछले 20 सालों में सीनेट पहुंचने वाली पहली अश्वेत महिला बनी थीं.

स्वभाव से काफी तेजतर्रार हैरिस एक भारतीय ब्रेस्ट कैंसर सर्जन श्यामला गोपालन की बड़ी बेटी हैं. गोपालन 1960 में चेन्नई से अमेरिका गई थीं और फिर वहीं बस गईं. वहां उन्होंने इकनॉमिक्स के प्रोफेसर डोनाल्ड हैरिस से शादी की. हालांकि, जमैकन मूल के हैरिस के साथ उनकी यह शादी ज्यादा दिन नहीं चली. जल्द ही दोनों अलग हो गए. तब कमला हैरिस की उम्र पांच साल थी. इसके बाद हैरिस और उनकी छोटी बहन माया की परवरिश उनकी मां ने ही की.

कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय से लॉ की पढ़ाई करने के बाद हैरिस ने कई साल तक एक वकील के तौर पर काम किया. इसके बाद 1990 से उन्हें कैलिफोर्निया की अल्मिडा शहर की उप डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी बनने का मौका मिला. 2003 में उन्हें सैन फ्रांसिस्को की ‘डिस्ट्रिक्ट गवर्नर’ चुना गया. इस मुकाम तक पहुंचने वाली व पहली महिला थीं और इस चुनाव में उन्होंने अपने बॉस रह चुके टेरेंस हलिनन को हराकर कइयों को चौंका दिया था.

यह चुनाव भी काफी उतार-चढ़ाव भरा था. दरअसल, इस दौरान टेरेंस हलिनन ने एक गंभीर आरोप लगाया था. उनका कहना था कि कमला हैरिस ने सैन फ्रांसिस्को के तत्कालीन गवर्नर विली ब्राउन को प्रेम संबंधों में फंसाकर उनके जरिये कई अहम पद हासिल किए हैं. लेकिन इन आरोपों के बावजूद कमला हैरिस ने हलिनन पर बड़ी जीत हासिल की. जानकार कहते हैं कि उस चुनाव में ही कइयों को कमला हैरिस की राजनीतिक कुशलता का अहसास हो गया था. इन लोगों के मुताबिक तब उन्होंने हलिनन को उन्हीं के खेल में मात दे दी थी. कमला हैरिस ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को बड़ी चतुराई से महिला विरोधी रंग देकर अपने पक्ष को मजबूत कर लिया था.

दो बार सैन फ्रांसिस्को की ‘डिस्ट्रिक्ट गवर्नर’ बनने के बाद कमला हैरिस ने 2011 में कैलिफोर्निया के अटॉर्नी जनरल पद के लिए दावेदारी ठोकी और कई महारथियों को पछाड़ते हुए लगातार दो बार राज्य की अटॉर्नी जनरल बनीं. कमला हैरिस इस पद पर चुनी जाने वाली पहली अश्वेत महिला थीं.

कमला हैरिस अपनी मां श्यामला गोपालन के साथ | फोटो : कमला हैरिस/ फेसबुक
कमला हैरिस अपनी मां श्यामला गोपालन के साथ | फोटो : कमला हैरिस/ फेसबुक

अमेरिकी पत्रकारों की मानें तो अटॉर्नी जनरल बनने के बाद कमला हैरिस ने अपने काम की दम पर तेजी से पार्टी के उच्च पदस्थ लोगों के बीच अपना दबदबा बनाया. पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा अपने कार्यकाल के दौरान कई बार उनकी तारीफों के पुल बांधते नजर आए थे. अपनी पार्टी में यह कमला हैरिस का कद ही था कि जब 2016 में उन्होंने कैलिफोर्निया से सीनेटर के लिए अपना नाम आगे बढ़ाया तो उन्हें किसी बड़े विरोध का सामना नहीं करना पड़ा. सीनेट के इस चुनाव में भी उन्होंने कद्दावर नेता और 20 साल से सांसद (प्रतिनिधि) लोरट्टा संचेज़ को शिकस्त दी थी.

कमला हैरिस की लगातार हो रही चुनावी जीतों की सबसे बड़ी वजह गरीब, अश्वेतों, अल्पसंख्यकों, प्रवासियों और समलैंगिकों के बीच बनी उनकी मजबूत पकड़ को बताया जाता है. उन्होंने इन लोगों के लिए कई बड़ी कानूनी लड़ाइयां लड़ी हैं. इन लड़ाइयों के दौरान कई बार तो वे अपनी ही पार्टी नेताओं के निशाने पर आ गईं. अमेरिकी मीडिया के मुताबिक इन तबकों से आने वाले ज्यादातर लोग यह तक कहते हैं कि हैरिस उनके हक के लिए किसी भी हद तक जा सकती हैं.

कमजोर तबकों की मदद के लिए हमेशा आगे रहने की वजह भी कमला हैरिस खुद बताती हैं. एक साक्षात्कार में वे कहती हैं, ‘बचपन से ही मैं ऐसे माहौल में पली-बढ़ी हैं जहां मैंने अन्याय के खिलाफ लोगों को लड़ते देखा...मेरे माता-पिता भी नस्लभेद के खिलाफ होने वाले आंदोलनों में हिस्सा लिया करते थे. बर्कले शहर में हमारे रंग की वजह से गोरे पड़ोसियों के बच्चे मेरे और मेरी बहन के साथ खेला नहीं करते थे.’ कमला हैरिस के मुताबिक इन्हीं सब सामाजिक बुराइयों को देखते हुए उन्होंने वकालत के पेशे को अपनाने का निर्णय लिया था. दरअसल, उस समय वे अच्छे से जान गई थी कि अगर किसी को न्याय दिलाना है तो आंदोलनों से कहीं ज्यादा जरूरी कानूनी लड़ाई लड़ना है.

कमला हैरिस के सीनेट में पहुंचने के बाद से उन्होंने हर मुद्दे पर डोनाल्ड ट्रंप का जमकर विरोध किया है. गन कंट्रोल और अल्पसंख्यकों सहित तमाम मुद्दों पर ये दोनों एक-दूसरे के धुर विरोधी रहे हैं. इसके अलावा जहां कमला हैरिस प्रवासियों की बड़ी हमदर्द बनी हुई हैं तो वहीं ट्रंप को प्रवासी फूटी आंख नहीं सुहाते. जानकारों की मानें तो अमेरिका की राजनीति में ओबामा और हिलेरी के जाने बाद अब जो शख्स ट्रंप विरोधी राजनीति के केंद्र में दिख रहा है वह कमला हैरिस ही हैं, और यही कारण है कि अमेरिकियों के एक बड़े वर्ग की उम्मीदें अब अगले चुनाव में उन पर आकर टिक गई हैं. राष्ट्रपति चुनाव में दावेदारी की घोषणा करने के 24 घंटों के अंदर उन्हें 15 लाख डॉलर (करीब 11 करोड़ रुपए) का चंदा मिलना भी यही बताता है.