सुप्रीम कोर्ट ने सामान्य वर्ग के लोगों को दस प्रतिशत आरक्षण देने संबंधी केंद्र के शासकीय आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है. इसके अलावा उसने नई आरक्षण नीति के तहत होने वाली नियुक्तियों के संबंध में भी आदेश जारी करने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि वह अभी इस मामले की जांच कर रहा है. हालांकि उसने सामान्य आरक्षण के खिलाफ दायर की गई जनहित याचिका पर सुनवाई करने की मंजूरी दे दी है. हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले में केंद्र को नोटिस जारी कर चार हफ्ते में जवाब मांगा है.

सामान्य आरक्षण के खिलाफ यह याचिका यूथ फॉर इक्वैलिटी नामक एनजीओ ने दायर की है. इसमें कहा गया है कि सामान्य आरक्षण संविधान के मूल ढांचे को बदलने का काम करता है. याचिका में यह भी कहा गया है कि सामान्य आरक्षण सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का भी उल्लंघन है जिसमें उसने आरक्षण की सीमा 50 प्रतिशत तय कर दी थी.

गौरतलब है कि इस महीने की शुरुआत में संसद में सामान्य आरक्षण संबंधी संविधान संशोधन विधेयक पारित किया गया था. इसे लेकर विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया था कि उसने आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर यह ‘हड़बड़ी भरा कदम’ उठाया है. उनका कहना था कि राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में हुए विधानसभा चुनावों में मिली हार से घबराकर भाजपानीत सरकार ने सामान्य आरक्षण का चुनावी कार्ड खेला है.