रोज़ शाम होने वाले स्पोर्ट्स शो के बाद क्रिकेट एक्सपर्ट्स और टीवी एंकर के बीच अमूमन ढेर सारी बातें होती हैं. ये एक्सपर्ट्स अकसर ग्लैमर और स्टारडम को क़रीब से देख चुके पूर्व खिलाड़ी होते हैं. ज़ाहिर है उनसे ड्रेसिंग रूम की कई कहानियां सुनने को मिल जाती हैं. ऐसी ही गपशप में क्रिकेट के एक पुराने सुपरस्टार ने मुझे बताया - ‘देखिए जब इंडिया की नीली जर्सी शरीर पर होती है, तो लगता है कि ना तो मुझसे ज़्यादा ख़ूबसू़रत कोई है और ना ही मुझसा टैलेंट कभी सामने आया है. लेकिन जिस दिन ये जर्सी उतरी, मानो सारा जादू एक पल में ख़त्म.’

हार्दिक पांड्या और केएल राहुल के साथ हाल में कुछ ऐसा ही हुआ. हमेशा टॉप बॉलीवुड सितारों की मौजूदगी से चमकने वाले करण जौहर के मशहूर शो ‘कॉफ़ी विद करण’ पर पहली बार दो क्रिकेटर मेहमान बनकर आए थे. करण के सवाल वैसे ही बिंदास थे जैसे उनके शो में अक्सर हुआ करते हैं लेकिन इस बार जो जवाब सामने आए वे क्रिकेट जगत और फ़ैन्स को धक्का पहुंचा गए. केएल राहुल के जवाब कुछ दबी ज़ुबान में थे लेकिन हार्दिक पांड्या पर नीली जर्सी का मैजिक ऐसा था कि उनकी बातें बॉलीवुड स्टार्स से भी ज़्यादा बेबाक और लापरवाह मालूम होती थीं. शो का यह एपिसोड जब ब्रॉडकास्ट हुआ उस वक्त हार्दिक ऑस्ट्रेलिया में थे और साथी खिलाड़ियों से इसकी बात करते नहीं थक रहे थे. तभी दौरे के बीचों-बीच जर्सी छिन जाने की नौबत आ गई और सभी को समझ में आ गया कि ज़ुबान पर क़ाबू होना कितना ज़रूरी है.

शो का यह एपिसोड अब ऑनलाइन सर्च करने पर नहीं मिलता. सिर्फ़ इससे जुड़ी ख़बरें सामने आ जाती हैं. जो लोग इसे नहीं देख पाए वे इतना जानते-समझते हैं कि खिलाड़ियों ने हंसी-ठहाकों के बीच लड़कियों से दोस्ती और सेक्स पर खुलकर अपने राज़ बताए. लेकिन जिस मूर्खता और शान से ये बातें की गई थीं वह परेशान करने वाला है. दो ऐसे खिलाड़ी जिन्हें टीम इंडिया की खोज माना जा रहा था, उन पर आज सुनील गावस्कर से लेकर हरभजन सिंह की आलोचनाओं के बम गिर रहे थे.

दो साल पहले आई बीसीसीआई की हैंडबुक ‘100 थिंग्स एवरी प्रोफ़ेशनल क्रिकेटर मस्ट नो’ ऐसे ही मौकों के लिए बनाई गई थी. उस किताब के पेज नंबर 77 पर साफ़-साफ़ मीडिया के ‘ट्रिक’ या मुश्किल सवालों से डील करने के बारे में लिखा गया है. मीडिया या एंकर्स की मंशा को समझकर जवाब देने या ना देने के बारे में भी यहां विस्तार से लिखा गया है. ज़ाहिर है केएल राहुल और हार्दिक पांड्या ने या तो वह मैनुएल नहीं पढ़ा था या उन्हें करण जौहर की बातों में वह मंशा दिखी नहीं थी. इसके चलते पांड्या ने खार जिमखाना की सदस्यता खोई, जिलेट का कॉन्ट्रैक्ट गंवाया, और लाखों की नज़रों में इज़्ज़त गई सो अलग. अब कोई महिला फ़ैन उनके साथ तस्वीर खिंचवाने से पहले शायद दो बार सोचेगी.

इस सबके बीच बीसीसीआई ने दोनों खिलाड़ियों को सस्पेंड करने का फ़ैसला कर डाला. यह बैन लगना ज़रूरी था. 90 के दशक में क्रिकेट से हुआ करोड़ों लोगों का मोहभंग हमारे सबसे बड़े कुछ सितारों के बहक जाने का ही नतीजा था. करण जौहर के सवालों के जवाब में खिलाड़ियों ने रात भर पार्टी करने, महिला फ़ैन्स से मिलने, उन्हें टीम होटल और कमरों में ले जाने की बातें बताई थीं. ये सब ऐंटी करपश्न ब्यूरो के नियम और सीरीज़ के बीच के अनुशासन को तोड़ने वाली बातें थीं. बैन लगना इसलिए भी ज़रूरी था कि भारत के लिए क्रिकेट खेलना लाखों युवाओं और उनके माता-पिताओं का सपना है. अपने बच्चे को हर रोज़ घंटों क्रिकेट की कोचिंग करवाने वाले मां-बाप को शायद यह सब सुनकर बड़ा अटपटा लगेगा कि हमारे कुछ खिलाड़ियों में देश के लिए खेलने से ज़्यादा उत्साह सेक्स और पार्टी को लेकर है.

ऐसा नहीं है कि भारत के सबसे बड़े क्रिकेटिंग सितारे ग्लैमर और चकाचौंध से दूर रहे होंगे. लेकिन सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़ और सौरव गांगुली जैसे खिलाड़ियों को ऐसे किसी विवाद या मुर्खतापूर्ण हरकतों के लिए याद नहीं किया जाता. विराट कोहली के अंडर-19 क्रिकेट के दिन भले ही हमें गाली-गलौज करते एक आक्रामक लड़के की याद दिलाते हैं. लेकिन यह भी याद रखना ज़रूरी है कि जब-जब सोशल मीडिया ने उनकी ख़राब फ़ॉर्म के लिए अनुष्का शर्मा को ज़िम्मेदार माना, वे बड़ी शालीनता से उनके समर्थन और बचाव में आगे आए. आज भी अगर विराट का इंस्टाग्राम हैंडल देखें तो एहसास होगा कि वे अपने परिवार ही नहीं, महिला फ़ैन्स के भी क़द्रदान मालूम होते हैं. यह समय के साथ मिली सीख और परिपक्वता का सबूत है.

लेकिन हार्दिक पांड्या और केएल राहुल पर लगा बैन हटना भी ज़रूरी था. ‘कूल’ लगने की कोशिश में कही गई उनकी बातें क्रिकेट के एक पूरे सिस्टम के लचर होने का सबूत भी हैं. जिस क्रिकेट बोर्ड ने अपने खिलाड़ियों को ऐसे मौक़ों के लिए तैयार नहीं किया उसे अब ज़िम्मेदारी लेकर युवा खिलाड़ियों को सही ट्रेनिंग देनी होगी. इस बात की मिसाल ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट बोर्ड है जिसने बरसों पहले रिकी पॉन्टिंग को एक बिगड़ैल युवा से शानदार क्रिकेटर और कप्तान में तब्दील किया. बैन हटना इसलिए भी ज़रूरी था क्योंकि एक विकसित समाज और अच्छा सिस्टम अपने बीच पनप रही प्रतिभाओं को ख़त्म नहीं करता बल्कि उन्हें सही राह पर डालता है. क्रिकेट के क़ानून में यह एक “आफ़ द फ़ील्ड” ग़लती है जिसकी सज़ा तय करने के लिए कई परतों से गुज़रना होगा. इसे सिर्फ़ क्रिकेट के लिहाज से ही नहीं बल्कि सामाजिक स्तर पर भी समझा जाना चाहिए.

बैन हटना इसलिए भी ज़रूरी था क्योंकि शायद टीम में अपनी जगह और ज़ुबान से निकले शब्दों की क़ीमत उन्हें इससे पहले पता नहीं थी. जैसे तेज़ रफ़्तार से चलने वाले ड्राइवर को लगी चोट, उसे स्पीड-लिमिट में रहने की याद दिलाती रहती है, ज़िंदगी का यह एपिसोड हार्दिक और राहुल के करियर में वैसा ही पड़ाव साबित हो सकता है. यह उन्हें एक खिलाड़ी और इंसान के तौर पर एक नई राह दिखा सकता है.