प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम की आज सोशल पर जमकर चर्चा रही. इस कार्यक्रम के तहत प्रधानमंत्री मोदी ने मंगलवार को स्कूली छात्रों और उनके अभिभावकों से बातचीत की है और उन्हें परीक्षा के दौरान तनावमुक्त रहने के टिप्स भी दिए हैं. फेसबुक और ट्विटर पर इस बातचीत से जुड़े कई वीडियो क्लिप शेयर किए गए हैं. साथ ही भाजपा समर्थकों के अलावा अन्य लोगों ने भी इस पहल के लिए प्रधानमंत्री की तारीफ की है. फेसबुक के जरिए आशुतोष उज्ज्वल ने प्रधानमंत्री पर चुटकी ली है, ‘अपनी परीक्षा सिर पर होने के बावजूद बच्चों की परीक्षा पर चर्चा की. ये होती है देश की निःस्वार्थ सेवा.’

इसी कार्यक्रम से जुड़ी एक घटना की सोशल मीडिया पर अलग से भी चर्चा हुई है. दरअसल यहां उपस्थित एक महिला ने प्रधानमंत्री से उनके बेटे को लगी ऑनलाइन गेमिंग की लत छुड़वाने के लिए सलाह मांगी थी. इस पर मोदी ने मजाकिया लहजे में कहा, ‘पबजी वाला (बच्चा) है क्या!’ प्रधानमंत्री के इस मजाकिया लहजे और उनके द्वारा लोकप्रिय ऑनलाइन गेम पबजी के जिक्र की वजह से यह गेम ट्विटर के ट्रेंडिंग टॉपिक में शामिल हुआ है. यहां कई लोगों ने इस पर हैरानी के साथ-साथ खुशी जताई है कि प्रधानमंत्री मोदी को इस ऑनलाइन गेम के बारे में भी जानकारी है. वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई का ट्वीट है, ‘इस बात के लिए प्रधानमंत्री मोदी की दाद देनी पड़ेगी... जब तक मैंने वीडियो नहीं देखा था, तब तक मुझे भी नहीं पता था कि पबजी क्या होता है... नई पीढ़ी के साथ जुड़ाव मोदी की ताकत है!’

वहीं दूसरी तरफ इस कार्यक्रम के बहाने विरोधियों ने मोदी को जमकर घेरा है और इस हवाले से यहां कई मजेदार टिप्पणियां भी आई हैं. सोशल मीडिया पर ‘परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम को लेकर आई ऐसी ही कुछ और दिलचस्प प्रतिक्रियाएं :

सलमान हमदान | @SalmanHamdaan

परीक्षा पे चर्चा में दिया गया एक सुझाव : अगर आपको सवाल का जवाब पता न हो तो नेहरू को जिम्मेदार ठहरा दो.

ट्रोलमेट |‏ @trollmate_offic

पबजी खेलते हुए मोदी जी की दुर्लभ तस्वीर :

नरेंद्र मोगली | @Troll_Modi

मेरे साथ ‘परीक्षा पे चर्चा’ में जुड़िए. यहां उदय चोपड़ा द्वारा बच्चों को एक्टिंग टिप्स और वेंकटेश प्रसाद द्वारा बैटिंग टिप्स दिए जाने के बाद मैं परीक्षा से जुड़ी कुछ टिप्स बताऊंगा.

कीर्तीश भट्ट | @Kirtishbhat

देवेंद्र मिश्रा | @Devendr62901380

परीक्षा पे चर्चा उस समय बेमानी हो जाती है जब बच्चों को पढ़ाने के लिए योग्य शिक्षक ही नहीं हैं. प्रधानमंत्री मोदी जी इन कमियों को दूर करने के उपाय क्यों नहीं बताते? हमारे गांवों में शिक्षा की गुणवत्ता बहुत बुरी है, इस पर चर्चा क्यों नहीं होती?