बीते साढ़े चार दशक के दौरान 2017-18 में बेरोजगारी की दर सबसे ज्यादा रहने से जुड़ी खबर आज सोशल मीडिया पर बहस का मुद्दा बनी हुई है. बिजनेस स्टैंडर्ड ने राष्ट्रीय सैंपल सर्वे की एक रिपोर्ट के हवाले से आज यह खबर दी थी. सोशल मीडिया पर जहां भाजपा समर्थकों ने इसे फर्जी बताया है तो वहीं विरोधियों ने इसके बहाने सरकार को घेरा है. इसके बहाने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ‘नमो’ (नरेंद्र मोदी) पर तंजभरा ट्वीट किया है, ‘नोमो (नो मोर) नौकरियां! फ्यूहरर (हिटलर) ने हर साल दो करोड़ नौकरियां देने का वादा किया था. पांच साल बाद रोजगार निर्माण पर उनका लीक हुआ रिपोर्ट कार्ड राष्ट्रीय आपदा का खुलासा कर रहा है. 45 सालों में बेरोजगारी की दर सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है...’

मोदी सरकार पर सरकारी आंकड़ों के साथ छेड़छाड़ कर उन्हें बेहतर दिखाने के आरोप लगते रहे हैं. वहीं आज इस खबर पर नीति आयोग ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा है कि ये आंकड़े अभी फाइनल नहीं है. इन्हीं बातों के जिक्र के साथ सोशल मीडिया पर मांग की जा रही है कि सरकार को जल्द से जल्द रोजगार से जुड़े आंकड़े जारी करने चाहिए. ट्विटर पर एक यूज़र ने मज़ेदार प्रतिक्रिया दी है, ‘रोजगार तो भूल ही जाइए, मोदी बेरोजगारी से जुड़े आंकड़े भी नहीं दे रहे हैं...’

सोशल मीडिया में इस खबर पर आई कुछ और दिलचस्प प्रतिक्रियाएं :

महेश विक्रम हेगड़े | @mvmeet

मोदी सरकार में बेरोजगारी की स्थिति सच में खतरनाक है. इस समय प्रधानमंत्री पद के 22 उम्मीदवार हैं जबकि पहले सिर्फ दो-तीन हुआ करते थे.

पवन सरकार | @EbullientMind

बैट्टी |‏ @MrBatty_

अगली ‘परीक्षा पे चर्चा’ में प्रधानमंत्री मोदी को बच्चों से कहना चाहिए – पढ़ाई करके क्या करोगे, नौकरी तो है ही नहीं!

आशुतोष उज्ज्वल | facebook

बेरोजगारी का आंकड़ा देने वालों की नौकरी रोजगार कहना चईये कि नई कहना चईये?

नाइट वॉचमैन | @knightwatchman_

राष्ट्रीय सैंपल सर्वे के जिन अधिकारियों ने बेरोजगारी सर्वे से जुड़ी रिपोर्ट पर काम किया है वे इस सर्वे के अगले राउंड में खुद सैंपल बन जाएंगे.

अमित तिवारी | facebook

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक़ बेरोजगारी पिछले 45 सालों में आज सबसे ज्यादा है...
अब लोग तीनों टाइम पकौड़े न खाएं तो उसमें भी मोदीजी की गलती?