नीति आयोग भले ही बेरोजगारी को लेकर नेशनल सैंपल सर्वे ऑफिस (एनएसएसओ) की रिपोर्ट को ‘ड्राफ्ट रिपोर्ट’ बता रहा हो, लेकिन राष्ट्रीय सांख्यिकीय आयोग (एनएससी) के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष पीसी मोहनन ने इसे ‘अंतिम रिपोर्ट’ बताया है. बता दें कि यह रिपोर्ट जारी नहीं किए जाने की वजह से ही पीसी मोहनन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में उन्होंने नीति आयोग की सफाई का खंडन किया और कहा कि जिसे ड्राफ्ट रिपोर्ट बताया जा रहा है, वही अंतिम रिपोर्ट है जिसे किसी और की मंजूरी की जरूरत नहीं है.

अखबार के मुताबिक पीसी मोहनन ने कहा, ‘यह अंतिम रिपोर्ट थी. एनएससी प्रक्रिया के तहत रिपोर्ट को मंजूरी देता है. हमने इसे मंजूरी दी. किसी और अधिकारी को अब इसे मंजूरी नहीं देनी है. एनएसएसओ की रिपोर्टें जारी होती थीं. विश्लेषण का काम रिपोर्ट के जारी होने के बाद होता है.’

इससे पहले बिजनेस स्टैंडर्ड अखबार ने सबसे पहले एनएसएसओ की रिपोर्ट के हवाले से खबर दी थी कि साल 2017-18 में देश में बेरोजगारी की दर छह प्रतिशत रही, जो कि 1972-73 के बाद सबसे अधिक है. रिपोर्ट में कहा गया कि नवंबर 2016 में मोदी सरकार द्वारा लगाई गई नोटबंदी का अर्थव्यवस्था पर बहुत बुरा असर पड़ा जिसकी वजह से नौकरियां घटी हैं.

लेकिन नीति आयोग ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि एनएसएसओ की रिपोर्ट को अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है. आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने कहा कि अंतिम रिपोर्ट मार्च तक जारी की जाएगी. लेकिन जब उनसे पूछा गया कि रिपोर्ट को अंतिम मंजूरी कौन देगा, तो उन्होंने कहा, ‘मेरे ख्याल से कैबिनेट इसे मंजूरी देगा. मैं नहीं जानता.’

राजीव कुमार से यह भी पूछा गया कि एनएसएसओ को लेकर नीति आयोग क्यों प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहा है. इस पर आयोग के उपाध्यक्ष ने कहा कि केंद्रीय सांख्यिकीय कार्यालय पहले योजना आयोग का हिस्सा था, इसलिए ‘नीति आयोग और एनएसएसओ पूरी तरह एक दूसरे से अलग नहीं हैं.’ इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि देश में रोजगार सृजन के पर्याप्त प्रमाण मौजूद हैं.