चुनावी साल में पेश किए गए अंतरिम बजट 2019-20 के बारे में सबको यह उम्मीद थी कि इसमें अप्रैल-मई में होने वाले लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखकर कई घोषणाएं की जाएंगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी सरकार का बजट इस बार भी अरुण जेटली ही पेश करते लेकिन उनके खराब स्वास्थ्य की वजह से यह काम पीयूष गोयल से उन्हें वित्त मंत्री का कार्यभार देकर कराया गया. उनके 104 मिनट के बजट भाषण का जो आधिकारिक दस्तावेज भारत सरकार ने अपनी वेबसाइट पर डाला है उसमें 8,000 से अधिक शब्द हैं. अपने औपचारिक भाषण के अतिरिक्त पीयूष गोयल ने जो बातें बोली हैं, उन्हें भी अगर इसमें शामिल कर लें तो बजट भाषण 10,000 शब्दों के पार चला जाता है. इतने लंबे बजट भाषण में अगले चुनावों को देखते हुए उन्होंने आम लोगों को लुभाने वाले कई वादे किए हैं. इनमें से कई चीजें तो अपेक्षित ही थीं लेकिन बजट में कुछ बातें ऐसी भी हैं जिनकी उम्मीद पहले से नहीं थी. इस बजट भाषण में कुछ अटपटी चीजें भी हैं. आम संसदीय परंपरा में यह उम्मीद नहीं की जाती कि ये चीजें बजट भाषण का हिस्सा बन सकती हैं.

राष्ट्रपति के अभिभाषण का विस्तार

बजट में सामान्य तौर पर अगले वित्त वर्ष के लिए घोषणाएं की जाती हैं. यह भी एक संसदीय परंपरा है कि हर बजट सत्र से पहले राष्ट्रपति का अभिभाषण होता है जिसमें वे केंद्र सरकार के कार्यों का लेखा-जोखा पेश करते हैं. इस बार भी 31 जनवरी, 2019 को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने नरेंद्र मोदी सरकार के कामकाज का विस्तृत ब्यौरा देश के सामने पेश किया.

जब पीयूष गोयल ने अंतरिम बजट भाषण देना शुरू किया तो शुरुआत के तकरीबन 20 मिनट तक यह लगता रहा कि वित्त मंत्री राष्ट्रपति के अभिभाषण को ही थोड़ी अलग भाषा में दोहरा रहे हैं. इस दौरान गोयल लगातार सरकार की उपलब्धियां गिनाते रहे. सरकार ने बजट भाषण की जो प्रति वेबसाइट पर डाली है उसमें करीब 2,000 शब्दों के बाद पहली बार कोई बजट की घोषणा सामने आती है. इस अंतरिम बजट में पहली घोषणा प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तौर पर की गई है.

चालू वित्त वर्ष से कुछ योजनाओं को लागू करने की घोषणा

अंतरिम बजट भाषण में वित्त मंत्री ने कई बार कहा कि यह पूर्ण बजट नहीं है इसलिए बड़ी घोषणाएं नहीं की जा सकती हैं. लेकिन फिर भी, जैसी कि सबको उम्मीद थी, उन्होंने चुनावी साल को देखते हुए इस बजट में कुछ बड़ी घोषणाएं की हैं. मोदी सरकार ने सीमांत किसानों के लिए 6,000 रुपये सालाना की निश्चित आय की योजना की घोषणा की. इसे यूनिवर्सल बेसिक इनकम का ही एक स्वरूप माना जा रहा है. आर्थिक समीक्षा 2016-17 में उस वक्त के मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम ने यूनिवर्सल बेसिक इनकम के कई माॅडलों की बात कही थी. सीमांत किसानों की यह योजना सुब्रमण्यम की उसी सोच से प्रभावित लग रही है.

ऐसे में किसानों को सीधे धन देने की मोदी सरकार की योजना अपेक्षित घोषणाओं की श्रेणी में ही मानी जा सकती है. लेकिन किसी ने यह उम्मीद नहीं की थी कि ऐसी किसी योजना को चालू वित्त वर्ष से ही लागू कर दिया जाएगा. इस योजना को वित्त मंत्री ने 1 दिसंबर, 2018 से लागू करने की घोषणा की है. उन्होंने कहा है कि 2000 रुपये की तीन किस्तों में यह आर्थिक मदद किसानों को दी जाएगी. इसका मतलब यह हुआ कि 1 दिसंबर, 2018 से इस योजना को लागू करके सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि लोकसभा चुनावों से पहले ही कुछ लाभार्थियों को 2,000 रुपये की पहली किस्त मिल जाए ताकि उसे इसका चुनावी लाभ मिल सके.

असंगठित मजदूरों के लिए पेंशन योजना

किसानों के लिए राहत की उम्मीद तो इस अंतरिम बजट से थी. कुछ लोग यह उम्मीद भी कर रहे थे कि किसी न किसी रूप में कर्ज माफी की घोषणा भी केंद्र सरकार कर सकती है. सरकार ने ऐसा नहीं करके सालाना आर्थिक मदद वाली पीएम किसान योजना की घोषणा कर दी. लेकिन फिर भी इसे इस मायने में अपेक्षित कहा जा सकता है कि किसानों के लिए कुछ न कुछ बड़ा तो किया जाना ही था. लेकिन ऐसी कोई उम्मीद असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को लेकर नहीं थी. आम तौर पर मजदूरों के बीच काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता मोदी सरकार पर यह आरोप मढ़ते रहे हैं कि श्रम सुधारों के नाम पर वह मजदूर विरोधी काम करती है. ईज आफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग में सुधार के लिए किए गए श्रम सुधारों को भी मजदूर विरोधी बताया जाता रहा है. ऐसे में असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए प्रधानमंत्री श्रम-योगी मानधन योजना की घोषणा पूरी तरह से अनपेक्षित ही है. इसके तहत असंगठित क्षेत्र में काम कर रहे श्रमिकों को 60 साल की उम्र से पेंशन दिए जाने की व्यवस्था की गई है. इसके लिए जितना मासिक अंशदान श्रमिक करेंगे उतना ही सरकार की ओर से भी किया जाएगा.

उरी फिल्म का प्रचार

हर वित्तीय वर्ष के लिए बजट पेश करने का प्रावधान भारतीय संविधान के अनुच्छेद-112 में किया गया है. बजट पेश करने से संबंधित भारत की अपनी समृद्ध संसदीय परंपरा भी रही है. बजट में सरकारी योजनाओं की उपलब्धियों का जिक्र होता है और अगर किसी क्षेत्र में निजी कोशिशों से कोई उपलब्धि हासिल की गई हो तो उसका भी सामान्य जिक्र होता आया है. इस तरह की बातों का उल्लेख किसी निजी कंपनी आदि का नाम लेकर करने की कोई संसदीय परंपरा नहीं रही है.

लेकिन पीयूष गोयल ने अपने अंतरिम बजट भाषण में निजी कंपनियों द्वारा बनाए गई फिल्म ‘उरी’ का उल्लेख तीन बार किया. भाजपा एक पार्टी के तौर पर भी इस फिल्म का प्रचार करती रही है. उसके नेता सिनेमा हाॅल बुक करके लोगों को यह फिल्म दिखा रहे थे और इसकी तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर पोस्ट कर रहे थे. वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने अपने बजट भाषण में उरी की न सिर्फ चर्चा की बल्कि लोगों से इसे देखने की अपील भी की. उन्होंने उरी को जोश दिलाने वाली फिल्म कहा. लोकतंत्र का मंदिर कही जाने वाली संसद में बजट भाषण के जरिए किसी फिल्म के प्रमोशन का संभवतः यह पहला मामला है. बेशक यह फिल्म सेना की सर्जिकल स्ट्राइक पर बनी है लेकिन फिर भी यह थोड़ा अटपटा तो था ही.

अगले दशक का विजन

एक तरफ तो वित्त मंत्री ने कहा कि यह अंतरिम बजट है, इसलिए बड़ी घोषणाएं नहीं की जा सकतीं. दूसरी तरफ उन्होंने अपने बजट भाषण में अगले एक दशक के लिए दस सूत्री विजन प्रस्तुत कर दिया. इतनी दीर्घकालिक घोषणा की उम्मीद अंतरिम बजट में शायद ही किसी को रही हो.

मोदी सरकार पहले भी कई दीर्घकालिक लक्ष्यों की घोषणा करती रही है. वह चाहे 2022 तक न्यू इंडिया के निर्माण की घोषणा हो. या फिर नीति आयोग के सात साल के स्ट्रैटजिक डाॅक्युमेंट के जरिए हासिल किए जाने वाले लक्ष्यों की.