केंद्र सरकार असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए अपनी नई पेंशन योजना में बदलाव कर सकती है. उसने अंतरिम बजट में घोषणा की थी कि 15,000 रुपये प्रति माह कमाने वाले श्रमिक इस योजना के अंतर्गत लाभान्वित हो सकेंगे. अब खबर है कि सरकार पेंशन योग्यता से संबंधित इस मानदंड को लचीला बना सकती है ताकि लाभार्थियों को वेतन बढ़ने के बाद भी इसका फायदा मिलता रहे.

हिंदुस्तान टाइम्स ने केंद्रीय श्रम मंत्रालय के एक अधिकारी के हवाले से बताया कि चूंकि यह योजना केवल 15,000 रुपये कमाने वाले श्रमिकों के लिए थी, ऐसे में इस बात की आशंका थी कि वेतन बढ़ने पर श्रमिकों को इससे बाहर किया जा सकता है. अधिकारी के मुताबिक सरकार ने इस समस्या की ओर ध्यान दिया जिसे इस महीने योजना के लागू होने से पहले हर कर लिया जाएगा.

सरकार इस बारे में क्या कर सकती है, इसे लेकर आर्थिक मामलों के सचिव संतोष गर्ग ने अखबार को बताया, ‘यह एक सहकारी योजना है (जिसमें श्रमिक व सरकार दोनों की तरफ से कुछ राशि बतौर अंश दी जाएगी). सरकार चाहे तो 15,000 रुपये को शुरुआती क्राइटेरिया मान कर चल सकती है. अगर इसमें (वेतन) बढ़ोतरी होती है, तो भी वह इसमें अपनी आय का अंश डाल कर योजना का लाभ लेते रह सकता है.’ वहीं, दूसरे विकल्प के तहत आय को महंगाई के मुताबिक एडजस्ट किया जा सकता है. गर्ग ने कहा, ‘एक स्टेज पर आकर अगर आपकी आय में वृद्धि होती है और आपका धन तुलनात्मक रूप से बढ़ता है, तो (योजना के तहत) सरकार का योगदान कम किया जा सकता है.’

गौरतलब है कि सरकार ने इस योजना के जरिए असंगठित क्षेत्र के दस करोड़ श्रमिकों को पेंशन का लाभ देने की घोषणा की है. ‘प्रधानमंत्री श्रम-योगी मानधन’ नामक इस योजना के तहत श्रमिक अपनी हर महीने की आय का छोटा सा हिस्सा देकर इसमें शामिल हो सकते हैं. अगर कोई श्रमिक 29 साल की उम्र में योजना में शामिल होता है, तो उसे हर महीने सौ रुपये का योगदान देना होगा. वहीं, 18 साल के श्रमिक के लिए योगदान अंश 55 रुपये प्रति महीना रखा गया है. सरकार हरेक श्रमिक के अंश के साथ अपनी तरफ से कुछ पैसा उसके पेंशन खाते में डालेगी. 60 साल की उम्र के बाद उसे हर महीने 3,00 रुपये बतौर पेंशन मिलेंगे.