पूर्व राष्ट्रपति व भारत रत्न डॉ एपीजे अब्दुल कलाम के बारे में कुछ आधी-अधूरी जानकारियां सोशल मीडिया पर काफ़ी समय से वायरल हैं. ये जानकारियां उनके देहांत के बाद एक पोस्ट के रूप में वायरल हुई थीं जो समय-समय पर सामने आकर ‘फ़र्ज़ी राष्ट्रवाद’ को बढ़ावा देने का काम करती हैं. डॉ कलाम से जुड़ी ये जानकारियां इन दिनों मुकेश व नीता अंबानी की बेटी की शादी के बहाने शेयर की जा रही हैं.

फ़ेसबुक, ट्विटर और वॉट्सएप जैसे प्लेटफ़ॉर्मों पर शेयर हो रहे इस मैसेज में लिखा है :

डॉ एपीजे अब्दुल कलाम द्वारा अपने पीछे छोड़ी गई संपत्ति का ब्यौरा इस प्रकार है :

6 पैंट (दो डीआरडीओ यूनिफ़ॉर्म शामिल)

4 शर्ट (दो डीआरडीओ यूनिफ़ॉर्म शामिल)

3 सूट (एक वेस्टर्न, बाक़ी दो भारतीय)

1 फ़्लैट (जिसे उन्होंने दान कर दिया)

2,500 किताबें

1 पद्म श्री

1 पद्म भूषण

1 भारत रत्न

16 डॉक्टरेट (उपाधियां)

1 वेबसाइट

1 ट्विटर अकाउंट

1 ईमेल आईडी

उनके पास कोई टीवी, एसी, कार, ज्वेलरी, शेयर, ज़मीन या बैंक बैलेंस भी नहीं था. उन्होंने अपने गांव के लिए अपनी आठ साल की पेंशन तक दान कर दी थी. वे एक महान देशभक्त थे. यह सुनिश्चित करें कि आपके सभी मित्र व प्रियजन इसे पढ़ें. अंबानी की बेटी की शादी का वीडियो शेयर करने के बजाय इसे आगे बढाएं.

इस मैसेज में डॉ कलाम से जुड़े जो भी दावे किए गए हैं, उनमें से कई सही हैं. लेकिन कुछ दावों पर सही तस्वीर पेश की जानी चाहिए. शुरुआत उनकी पेंशन और फ़्लैट से जुड़े दावे से करते हैं.

वायरल मैसेज के मुताबिक़ एपीजे अब्दुल कलाम ने अपनी पेंशन और फ़्लैट दोनों दान कर दिए थे. इस बारे में हमने वे आर्टिकल देखे जो उनके निधन के बाद लिखे गए थे. वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक जावेद अंसारी ने कलाम को लेकर अपने लेख में लिखा था कि पूर्व राष्ट्रपति के पास आय के नाम पर केवल अपनी किताबों से मिलने वाली रॉयल्टी के रूप में मिली राशि और पेंशन थी. राष्ट्रपति बनने के बाद और निधन से पहले आठ बरसों तक उन्होंने सरकार से मिलने वाली पेंशन स्वीकार की. इसका कुछ हिस्सा वे अपने परिवार के लोगों के लिए भेजते थे. लेकिन उन्होंने पेंशन दान कर दी थी, इस दावे से संबंधित कोई विश्वसनीय रिपोर्ट या लिंक हमें नहीं मिला.

फ़्लैट दान करने का दावा भी सही नहीं लगता, क्योंकि डॉ कलाम की कोई संपत्ति थी ही नहीं. कुछ न होने की सूरत में कोई दान कैसे कर सकता है. कुछ रिपोर्टों के मुताबिक़ उनके भतीजे जैनुलबदीन का कहना था कि कलाम के पिता के पास एक पुश्तैनी घर और उसके नज़दीक छोटी सी ज़मीन थी. कलाम ने इस ज़मीन की देखभाल की पूरी ज़िम्मेदारी अपने बड़े भाई को सौंप दी थी. बाद में उनके परिवार के लोग उस ज़मीन और घर की देखरेख करने लगे.

कलाम साहब को डॉक्टरेट की कई उपाधियां मिली थीं. लेकिन इनकी संख्या 16 (जैसा कि वायरल मैसेज में बताया गया है) नहीं, बल्कि 48 थी. भारत और दुनिया के 48 विश्वविद्यालयों व शिक्षण संस्थानों ने उन्हें डॉक्टरेट की उपाधि से नवाज़ा था.

अब बात करते हैं डॉ कलाम के निधन के बाद बचे उनके कपड़ों की. मैसेज में कहा गया है कि पूर्व राष्ट्रपति के पास केवल छह पैंट थीं. इनमें से दो डीआरडीओ यूनिफ़ॉर्म थीं. चार शर्ट थीं. इनमें भी दो डीआरडीओ यूनिफ़ॉर्म थीं. इस तरह कलाम के पास चार सामान्य पैंट व दो सामान्य शर्ट बचीं. यह संख्या सही है या नहीं, यह दावा हम नहीं कर सकते. लेकिन थोड़ा लॉजिक ज़रूर लगाया जा सकता है जो फ़र्ज़ी ख़बरों के खिलाड़ियों ने नहीं लगाया.

पहली बात यह कि डीआरडीओ (डिफ़ेंस रिसर्च एंड डेवलेपमेंट ऑर्गनाइज़ेशन) में कोई ड्रेस कोड नहीं है. रक्षा मंत्रालय के तहत आने वाले इस संस्थान में लोग सामान्य कपड़े पहनते हैं. इसलिए कलाम के बचे कपड़ों में ‘डीआरडीओ यूनिफ़ॉर्म’ वाली बात बेतुकी है. अगर डीआरडीओ में कोई ड्रेस कोड होता तो भी कलाम के पास उसका कोई यूनिफ़ॉर्म मुश्किल ही होता क्योंकि 1969 में ही यहां से उनका ट्रांसफ़र भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) में कर दिया गया था.

वहीं, राष्ट्रपति बनने और इस पद से मुक्त होने के बाद कलाम ने एक ही रंग के सूट (बंद गले के) और पैंट पहने. आपको उनके राष्ट्रपति बनने के बाद शायद ही ऐसी कोई तस्वीर मिले, जिसमें उन्होंने सूट और पैंट अलग-अलग रंग के पहने हों. वायरल मैसेज कहता है कि उनके पास छह पैंट थीं और तीन सूट थे, जिनमें एक वेस्टर्न था और बाक़ी दोनों भारतीय सूट थे. तो अब सवाल यह है कि मैसेज वायरल करने वालों को शेष पैंटों के साथ के सूट मिले नहीं या उनसे गुम हो गए!

डॉ कलाम सादा मिज़ाज थे. लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि व्यक्ति पुराने कपड़े पहने. इकनॉमिक टाइम्स की यह रिपोर्ट पढ़कर पता चल जाता है कि वे समय-समय पर कपड़े सिलवा लेते थे. हमारी जांच में यह मैसेज भ्रामक साबित हुआ है. इसमें देश की एक बेहद प्रतिष्ठित हस्ती को ‘राष्ट्रवादी हथियार’ बनाकर अलग-अलग मौक़ों पर बार-बार इस्तेमाल किया जा रहा है.