भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने रेपो दर 0.25 प्रतिशत घटाकर 6.25 प्रतिशत की है. आज मौद्रिक नीति समिति की बैठक में चार सदस्यों ने नीतिगत दर में कटौती के पक्ष में, जबकि दो सदस्यों ने इसके खिलाफ अपना मत दिया. इस फैसले के बाद लोन सस्ते होने की उम्मीद जताई जा रही है. वहीं, लिए हुए लोन की ईएमआई भी कम हो सकती है.

पीटीआई के मुताबिक बैठक के बाद आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि आरबीआई ने वित्त वर्ष 2019-20 में देश की जीडीपी वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत तक रहने का अनुमान जताया है. वहीं, वित्त वर्ष 2018-19 के लिए यह अनुमान 7.2 प्रतिशत रखा गया है. उन्होंने कहा कि अगले वित्त वर्ष की पहली छमाही के लिए मुद्रास्फीति अनुमान 3.2 से 3.4 प्रतिशत रखा गया है. वहीं, तीसरी तिमाही के लिए मुद्रास्फीति की दर 3.9 प्रतिशत रखी गई है. और चौथे तिमाही में इसे घटा कर 2.8 प्रतिशत रखा गया है.

क्या है रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट?

रेपो रेट वह दर होती है जिस पर आरबीआई अन्य बैंकों को कर्ज देता है. इसी कर्ज से बैंक ग्राहकों को ऋण की सुविधा मुहैया कराते हैं. अगर रेपो रेट कम होता है तो इसका मतलब है कि बैंक से मिलने वाले सभी प्रकार के कर्ज सस्ते हो जाएंगे. वहीं, बैंकों को आरबीआई में धन जमा कराने पर जिस दर से ब्याज मिलता है उसे रिवर्स रेपो रेट कहते हैं.