सुप्रीम कोर्ट ने बिहार के मुजफ्फरपुर बालिका गृह यौन उत्पीड़न मामले को दिल्ली की एक अदालत में स्थानांतरित करने का आदेश दिया है. देश की शीर्ष अदालत के मुताबिक उसने यह फैसला ‘स्वतंत्र और निष्पक्ष’ सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए किया है. अब तक यह मामला बिहार की सीबीआई अदालत में चल रहा था. आगे इसकी सुनवाई दिल्ली में साकेत स्थित पॉस्को अदालत करेगी. सुप्रीम कोर्ट ने इस अदालत को छह महीने के भीतर सुनवाई पूरी करने का निर्देश दिया है.
इसके साथ ही गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने आश्रय गृहों के प्रबंधन को लेकर बिहार सरकार को जमकर लताड़ भी लगाई है. इंडिया टुडे के मुताबिक कोर्ट ने कहा है, ‘बहुत हुआ. बच्चों के साथ इस तरह का बर्ताव नहीं किया जा सकता. आप अपने अधिकारियों को बच्चों से इस तरह पेश आने की इजाजत नहीं दे सकते. कम से कम बच्चों को तो बख्श दीजिए.’
वहीं आज सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की जांच कर रहे सीबीआई अधिकारी का तबादला किए जाने पर जांच एजेंसी के अंतरिम निदेशक रहे एम नागेश्वर राव को अवमानना का नोटिस भी भेजा है. यह जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में ही हो रही है. बीते दिनों सीबीआई के अंतरिम प्रमुख का कार्यभार संभाल रहे नागेश्वर राव ने अदालत से पूछे बिना इस मामले की जांच कर रहे अधिकारी एके शर्मा का तबादला सीआरपीएफ में कर दिया था. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए राव को व्यक्तिगत रूप से 12 फरवरी को अदालत में पेश होने का निर्देश दिया है.
पीटीआई के मुताबिक प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने सीबीआई निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला को उन अधिकारियों के नाम बताने का निर्देश भी दिया है जो एके शर्मा का तबादला करने की प्रक्रिया का हिस्सा थे. इन अधिकारियों को भी 12 फरवरी को कोर्ट में पेश होने को कहा गया है.
मुजफ्फरपुर बालिका गृह में यौन शोषण का यह मामला बीते साल मई में सामने आया था. तब टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टिस) के ऑडिट के दौरान यहां की बच्चियों से बातचीत करने के बाद एक रिपोर्ट तैयार की गई थी. इस रिपोर्ट से पता चला था कि यहां रहने वाली करीब 40 में से आधी से ज्यादा बच्चियों का यौन शोषण किया गया था. यह बालिका गृह एक गैरसरकारी संगठन (एनजीओ) चलाता था. यह घटना सामने आने के बाद इस एनजीओ के सर्वेसर्वा और इस मामले के मुख्य आरोपित बृजेश ठाकुर को गिरफ्तार किया गया था. शुरू में यह मामला बिहार पुलिस ही देख रही थी लेकिन बाद में इसे सीबीआई को सौंप दिया गया.
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