रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने बृहस्पतिवार को कहा कि आरबीआई से अंतरिम लाभांश मांगना और उसे अपनी इच्छानुसार उपयोग में लाना सरकार का अधिकार है. सरकार ने लगातार दूसरे साल आरबीआई से अंतरिम लाभांश के तौर पर 28 हजार करोड़ रुपये की मांग की है. दास ने कहा कि बैंक का केंद्रीय निदेशक मंडल 18 फरवरी को होने वाली अगली बैठक में इस मांग पर विचार करेगा.

बतौर आरबीआई गवर्नर अपनी पहली मौद्रिक समीक्षा के बाद दास ने कहा, ‘अधिशेष राशि या अंतरिम लाभांश का भुगतान आरबीआई कानून का हिस्सा है. अत: हम ऐसा कुछ नहीं कर रहे हैं, जो कानून से अलग हो. सरकार लाभांश राशि का कैसे उपयोग करती है, यह उसका अपना निर्णय होगा.’ दास बजट के आंकड़ों को लेकर विश्वसनीयता के साथ-साथ बजट में की गयी कई कल्याणकारी योजनाओं का राजकोषीय घाटे पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में पूछे गये सवालों को भी टाल गये.

भाजपा नीत सरकार ने चुनावी साल में 12 करोड़ छोटे एवं सीमांत किसानों के खातों में नकद राशि डालने का फैसला किया है. कई आलोचक इसे नाराज किसानों को शांत करने के लिये उठाया गया कदम बता रहे हैं. उनका कहना है कि इस राशि को आरबीआई से मिलने वाले 28,000 करोड़ रुपये के लाभांश से पूरा किया जाएगा. आर्थिक मामलों के सचिव एससी गर्ग ने कहा था कि सरकार अंतरिम लाभांश के रूप में आरबीआई से 28,000 करोड़ रुपये चाहती है.