दिल्ली हाई कोर्ट ने ऑनलाइन स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म जैसे नेटफ्लिक्स और अमेजॉन प्राइम पर पाबंदी लगाने से जुड़ी एक जनहित याचिका खारिज कर दी है. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक चीफ जस्टिस राजेंद्र मेनन और जस्टिस वीके राव की बेंच ने यह कहते हुए याचिका खारिज की है कि इन प्लेटफॉर्म पर पाबंदी का आधार जनहित नहीं हो सकता. इसके साथ ही अदालत ने कहा है कि जब तक इन प्लेटफॉर्म की प्रसारण सामग्री के नियमन की रूपरेखा तैयार नहीं हो जाती तब तक वह इस मसले पर कोई फैसला नहीं करेगा.

यह याचिका एक गैर-सरकारी संगठन ‘जस्टिस फॉर राइट्स’ ने दाखिल की थी. इसमें दावा किया गया था कि इन प्लेटफॉर्म पर प्रसारित कार्यक्रमों में अश्लील, अभद्र और भड़काऊ कंटेंट दिखाया जाता है और इसका कोई प्रमाणन भी नहीं होता. याचिका में यह भी कहा गया था कि इस तरह का ज्यादातर कंटेंट भारतीय दंड संहिता और सूचना तकनीकी कानून, 2000 का उल्लंघन है. इससे पहले बीते साल नवंबर में दिल्ली हाई कोर्ट ने इस याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब भी मांगा था.

वहीं जनवरी में वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स, हॉटस्टार, वूट, टाइम्स इंटरनेट, इरोज़, आल्टबालाजी, जी, आरे और सोनी ने सरकारी सेंसरशिप से बचने के लिए अपने कंटेंट के स्वनियमन (सेल्फ रेगूलेशन) का फैसला किया था. तब ये प्लेटफॉर्म इस बात के लिए सहमत हुए थे कि वे अपने कंटेंट के साथ ऐसे फिल्टर लगाएंगे जिससे उनकी ऑडियंस को पता चल सके कि कौन से कार्यक्रम देखना उनके लिए उचित है.