सुप्रीम कोर्ट गुजरात के गृह मंत्री रहे हरेन पंड्या की हत्या की नए सिरे से जांच को लेकर दाखिल याचिका पर 12 फरवरी को सुनवाई के करेगा. यह याचिका एक गैर-सरकारी संगठन सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (सीपीआईएल) की तरफ से दाखिल की गई है. इसमें कहा गया है कि हाल ही में हरेन पंड्या हत्याकांड से जुड़ी कुछ नई जानकारियां सामने आई हैं और इनको लेकर सीबीआई ने कोई जांच नहीं की थी.

इस याचिका में सोहराबुद्दीन शेख मुठभेड़ मामले के गवाह आजम खान के बीते साल नवंबर में मुंबई की एक निचली अदालत में दिए बयान का हवाला दिया गया है. इस बयान के मुताबिक आजम खान को शेख ने बताया था कि हरेन पंड्या की हत्या की सुपारी दी गई थी और इसमें पुलिस का एक वरिष्ठ अधिकारी शामिल था. आजम खान ने यह भी दावा किया था कि उसने 2010 में सीबीआई अधिकारियों को भी यह बात बताई थी लेकिन उन्होंने उसका यह बयान दर्ज करने से इनकार कर दिया था.

पीटीआई के मुताबिक सीपीआईएल की याचिका में यह भी कहा गया है कि आजम खान की गवाही के मुताबिक हरेन पंड्या हत्याकांड में रिटायर्ड आईपीएस डीजी वंजारा और अन्य पुलिस अधिकारियों के साथ राजनीतिक व्यक्तियों के शामिल होने की भी संभावना है. याचिका के अनुसार इस गवाह ने यह भी खुलासा किया कि सोहराबुद्दीन के साथ तुलसीराम प्रजापति ने दो अन्य व्यक्तियों के साथ पंड्या की हत्या की थी.

हरेन पंड्या नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली गुजरात सरकार में गृहमंत्री थे. हालांकि 2003 में उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था और इसी साल 26 मार्च को अहमदाबाद के लॉ गार्डन के बाहर कार में गोली मारकर उनकी हत्या कर दी गई थी. वे यहां सुबह की सैर के लिए आए थे. इस हत्याकांड की शुरुआती जांच तत्कालीन पुलिस उपायुक्त डीजी वंजारा के नेतृत्व में क्राइम ब्रांच ने की थी. हालांकि हरेन पंड्या की पत्नी जागृति पंड्या ने इस पर कई सवाल उठाए थे.

इस हत्याकांड की जांच बाद में सीबीआई को सौंप दी गई, जिसने इस मामले में 15 लोगों को अभियुक्त बनाया था. जून, 2007 में इनमें से 12 लोगों को ट्रायल कोर्ट ने दोषी ठहरा दिया था लेकिन गुजरात हाई कोर्ट ने इन सभी आरोपितों को पर्याप्त सबूत न होने के आधार पर बरी कर दिया था. इस मामले में सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी जो अभी लंबित है.