राजस्थान में गुर्जर समुदाय का आरक्षण आंदोलन फिर शुरू हो गया है. इसकी वज़ह से शनिवार को पश्चिम-मध्य रेलवे को दिल्ली-मुंबई मार्ग की पांच ट्रेनें रद्द करनी पड़ीं. जबकि 15 का रास्ता बदलना पड़ा.

ख़बरों के मुताबिक गुर्जर समुदाय के लोग सवाई माधोपुर के नज़दीक मलारना डूंगर में रेलवे ट्रैक और सड़क मार्ग पर धरना दे रहे हैं. गुर्जर नेता कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला के नेतृत्व में धरना-प्रदर्शन शुक्रवार को शुरू हुआ था. गुर्जर समुदाय सरकारी नौकरियाें और शिक्षण संस्थानों में पांच फ़ीसदी आरक्षण लागू करने की मांग कर रहा है. इसका वादा राजस्थान सरकार ने किया था. कर्नल बैंसला ने समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा, ‘अगर आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों के लिए 10 फ़ीसदी आरक्षण का इंतज़ाम हो सकता है तो हमारे लिए क्यों नहीं. लेकिन सरकार ने हमारी मांग पर अब तक ध्यान नहीं दिया. इसलिए हमें मज़बूरन धरना-प्रदर्शन की राह पकड़नी पड़ी.’

इधर बताया जाता है कि राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार ने गुर्जर समुदाय से बातचीत के लिए तीन सदस्यों की समिति बनाई है. इसमें राज्य के मंत्री रघु शर्मा, विश्वेंद्र सिंह और मास्टर भंवर लाल को शामिल किया गया है. ग़ौरतलब यह भी है कि 2017 में राज्य की तत्कालीन भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने विशेष श्रेणी बनाकर गुर्जरों को पांच फ़ीसदी आरक्षण देने का वादा किया था. इसके लिए विधानसभा में विधेयक भी लाया गया. लेकिन राजस्थान उच्च न्यायालय ने इस पर रोक लगा दी और यह मामला अटकल गया.

वैसे गुर्जरों की आरक्षण की मांग काफ़ी पुरानी है. इसके लिए वे 2007 से 2015 तक लगातार कई बार आंदोलन कर चुके हैं. साल 2007 और 2008 के आंदोलनों के दौरान तो 70 से ज़्यादा लोग पुलिस और सुरक्षाबलों की सख़्ती से मारे भी गए थे. इस आंदोलन के दौरान रेल और सड़क यातायात रोकना सामान्य बात हो चुकी है. साल 2010 और 2015 के आंदोलनों में भी यही स्थिति बनी थी.