बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष मायावती ने मीडिया और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लोगों से कहा है कि वे सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी को तोड़-मरोड़कर पेश न करें. स्क्रोल डॉट इन के मुताबिक मायावती ने यह बात एक ट्वीट के जरिये कही है. इसी ट्वीट में उन्होंने आगे लिखा है, ‘माननीय न्यायालय में अपना पक्ष पूरी मजबूती के साथ आगे भी रखा जाएगा. हमें पूरा भरोसा है कि इस मामले में शीर्ष न्यायालय से हमें पूरा इंसाफ मिलेगा. इस मामले में मीडिया व भाजपा के लोग गलत खबर न फैलाएं तो बेहतर है.’

इसके साथ ही एक अन्य ट्वीट में बसपा सुप्रीमो ने यह भी लिखा है, ‘ये स्मारक और पार्क सदियों से तिरस्कृत दलित समुदाय में जन्मे महान संतों, गुरुओं और महापुरुषों के प्रति सम्मान है. यह उत्तर प्रदेश की पहचान के साथ व्यस्त पर्यटन स्थल भी हैं. इनके आकर्षण से सरकार को नियमित आय भी होती है.’

इससे पहले इसी शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के इन स्मारकों पर टिप्पणी करते हुए सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने इन्हें आम आदमी के पैसों का बेजा इस्तेमाल बताया था. इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि नोएडा और लखनऊ में बने इन पार्कों में लगाई गई मूर्तियों के खर्च को उन्हें (मायावती) लौटाना चाहिए. इस मामले को लेकर अंतिम सुनवाई दो अप्रैल को होगी.

मायावती साल 2007 से 2012 के दौरान उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रही थीं. उसी दौरान उन्होंने नोएडा और लखनऊ में स्मारकों और पार्कों का निर्माण कराया था. इनमें खुद मायावती के अलावा बसपा के संस्थापक कांशीराम और पार्टी के चुनाव चिह्न हाथी की मूर्तियां लगाई गई हैं. बताया जाता है कि तब इन स्मारकों और मूर्तियों के निर्माण पर 2600 करोड़ रुपये खर्च हुए थे.