‘ऐसा लगता है कि विपक्षी दल मुझे गालियां देने के लिए ओलंपिक में प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं.’  

— नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री

नरेंद्र मोदी ने यह बात त्रिपुरा के अगरतला में एक रैली को संबोधित करते हुए कही. इस मौके पर विपक्षी दलों के ‘महागठबंधन’ को उन्होंने ‘अवसरवादिता’ का उदाहरण भी बताया. उन्होंने कहा, ‘इस गठबंधन के नेता कोलकाता में एक मंच पर एक-दूसरे का हाथ पकड़कर फोटो खिंचवाते हैं. लेकिन त्रिपुरा, केरल और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में एक-दूसरे का चेहरा तक नहीं देखना चाहते.’ इसके साथ ही नरेंद्र मोदी का यह भी कहना था कि देश को भ्रमित करने वाले इस गठबंधन को आगामी आम चुनाव में जीत मिलने वाली नहीं है.

‘आम चुनाव से पहले महागठबंधन की कल्पना नहीं की जा सकती.’  

— सीताराम येचुरी, मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी के महासचिव

सीताराम येचुरी ने यह बात पत्रकारों से बातचीत करते हुए कही. इसके साथ ही उनका यह भी कहना था कि आगामी आम चुनाव में मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी (माकपा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के ‘विरोधी मतों’ को एकजुट करने का काम करेगी. इसके लिए स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर ‘चुनावी सहयोग’ किया जाएगा. सीताराम येचुरी का यह भी कहना था कि धर्मनिरपेक्ष दलों के साथ चुनावी सहयोग की यह रूपरेखा अगले महीने के पहले हफ्ते में तय की जाएगी.


 ‘कांग्रेस के नेता भाजपा की विफलताओं से आम जनता को अवगत कराएं.’  

— राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष

राहुल गांधी ने यह बात पार्टी की प्रदेश इकाइयों के प्रमुखों और विधायक दल के नेताओं के साथ हुई एक बैठक में कही. इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि बेरोजगारी व कृषि जैसे मोर्चों पर भाजपा सरकार नाकाम साबित हुई है. आगामी आम चुनाव को देखते हुए ऐसे मुद्दों को जनता के बीच जोर-शोर से उठाए जाने की जरूरत है. इसके साथ ही राहुल गांधी ने पार्टी नेताओं को संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार की उपलब्धियों को भी जनता तक पहुंचाने के निर्देश दिए.


‘सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी को भाजपा और मीडिया के लोग तोड़-मरोड़कर पेश न करें.’  

— मायावती, बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष

मायावती ने यह बात उत्तर प्रदेश में अपनी सरकार के कार्यकाल के दौरान नोएडा और लखनऊ में बनवाए गए स्मारकों को लेकर एक ट्वीट के जरिये कही है. इसी ट्वीट में उन्होंने आगे लिखा, ‘माननीय न्यायालय में अपना पक्ष पूरी मजबूती के साथ आगे भी रखा जाएगा. हमें पूरा भरोसा है कि इस मामले में शीर्ष न्यायालय से हमें पूरा इंसाफ मिलेगा.’ इससे पहले इसी शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने इन स्मारकों के निर्माण पर हुए खर्च को आम लोगों के पैसों का बेजा इस्तेमाल बताया था.


‘मोदी सरकार के कार्यकाल में भारत-श्रीलंका के आपसी संबंधों में गिरावट आई है.’  

— महिंदा राजपक्षे, श्रीलंका में विपक्ष के नेता

महिंदा राजपक्षे ने यह बात कर्नाटक के बेंगलुरु में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कही. इसके साथ ही उन्होंने भारत-श्रीलंका के आपसी संबंधों को लेकर एक स्थाई नियम होने की जरूरत भी बताई. उन्होंने कहा, ‘यदि भारत की एक सरकार का श्रीलंका के साथ अच्छा संबंध है तो आने वाली सरकार में भी यह स्थिति कायम रहनी चाहिए.’ उनका यह भी कहना था, ‘पिछले अनुभवों से साफ है कि सत्ता परिवर्तन के तुरंत बाद भारत-श्रीलंका के द्विपक्षीय संबंधों में व्यवधान का खतरा पैदा हो जाता है. लेकिन इन्हें आसानी से टाला जा सकता है.’