देश के 20 प्रबंधन संस्थानों (आईआईएम) की तरह जल्दी ही भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) को भी अपने प्रमुख और चेयरमैन नियुक्त करने का अधिकार मिल सकता है. खबर है कि आईआईटी के निदेशकों की समिति ने इस बारे में सरकार से सिफारिश की है. अगर सरकार ने समिति की सिफारिशों को माना तो आईआईएम संस्थानों की तरह आईआईडी संस्थानों के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स (बीओजी) में भी सरकारी नियंत्रण काफी कम हो जाएगा.

पिछले साल नए भारतीय प्रबंधन संस्थान अधिनियम (आईआईएम एक्ट) के तहत देश के 20 बड़े बिजनेस स्कूलों को पोस्ट-ग्रैजुएट डिप्लोमा की बजाय डिग्री प्रदान करने के अधिकार के अलावा हर प्रकार की स्वतंत्रता दी गई थी. इनमें सभी 20 आईआईएम को अपने चेयरमैन व निदेशक स्वयं नियुक्त करने का अधिकार शामिल है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक आईआईटी निदेशकों के पैनल ने आईआईएम एक्ट का अध्ययन करने के बाद अपनी रिपोर्ट पिछले हफ्ते सरकार को सौंप दी. खबर के मुताबिक समिति ने आईआईटी संस्थानों में वही बदलाव करने की बात कही है, जो नए आईआईएम एक्ट के तहत प्रबंधन संस्थानों में किए गए हैं. रिपोर्ट में समिति ने बोर्ड द्वारा संस्थान के प्रमुख और चेयरमैन नियुक्त करने के अलावा बोर्ड का विस्तार करने को भी कहा है.

आईआईटी एक्ट, 1961 की धारा 11 के तहत आईआईटी के बोर्ड में नौ सदस्य होते हैं. इसके सभी सदस्य प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सरकार द्वारा नामित किए जाते हैं. वहीं, नए आईआईएम एक्ट में बिजनेस स्कूलों के बोर्ड में कुल 15 सदस्यों को होने की बात कही गई है. इनमें से पांच संस्थान के पूर्व छात्र होने चाहिए. आईआईटी पैनल ने सिफारिश की है कि इसी तर्ज पर आईआईटी संस्थानों के चार पूर्व छात्रों को आईआईटी बोर्ड में शामिल किया जाए और एक सदस्य सरकार द्वारा नामित किया जाए.

इस तरह बोर्ड के सदस्यों की संख्या नौ से बढ़ा कर 14 की जाए. समिति ने यह भी कहा कि इन 14 सदस्यों में से दो महिलाएं और एक सदस्य अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति का होना चाहिए. फिलहाल मानव संसाधन विकास मंत्रालय के नेतृत्व में आईआईटी परिषद निदेशक की नियुक्ति करती है. इसके लिए पहले राष्ट्रपति की मंजूरी ली जाती है.