रफाल सौदे को लेकर ‘द हिंदू’ अखबार ने एक और रिपोर्ट दी है. इसमें उसने बताया है कि इस सौदे से संबंधित समझौते पर हस्ताक्षर करने से कुछ ही दिन पहले सरकार ने इसमें भ्रष्टाचार को लेकर जोड़े गए जुर्माना संबंधी प्रावधानों को हटा दिया था.

रिपोर्ट के मुताबिक यह सौदा 2013 के मानक रक्षा खरीद प्रक्रिया (डीपीपी) के तहत किया गया था. इसके तहत भ्रष्टाचार होने, अनुचित प्रभाव, एजेंट/एजेंसी से जुड़े कमीशन आदि को लेकर जुर्माना संबंधी प्रावधान किए गए थे. लेकिन बाद में इन प्रावधानों को हटा लिया गया. रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने उस प्रावधान को भी हटा दिया जिसके तहत उसे दसॉ एविएशन और एमबीडीए फ्रांस दोनों कंपनियों के खातों में पहुंच का अधिकार था.

अखबार ने सरकारी दस्तावेजों के आधार पर बताया कि पूर्व रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर की अगुआई वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) ने सितंबर, 2016 में समझौते, सप्लाई प्रोटोकोल, ऑफसेट समझौते और ऑफसेट शेड्यूल में आठ बदलावों का समर्थन कर इन्हें मंजूर किया था. रिपोर्ट के मुताबिक यह सब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई में रक्षा मामलों की कैबिनेट समिति की बैठक में समझौते और इससे जुड़े दस्तावेजों को मंजूरी देने के बाद हुआ.

रफाल मामले में द हिंदू की इस नई रिपोर्ट के बाद कांग्रेस मोदी सरकार पर हमलावर हो गई है. पार्टी के नेताओं ने एक के बाद एक ट्वीट कर सरकार पर निशाना साधा है. पी चिदंबरम ने ट्वीट कर कहा, ‘कोई सॉवरेन गारंटी नहीं, बैंक गारंटी नहीं, कोई एस्क्रो अकाउंट नहीं, फिर भी एडवांस में बड़ी राशि का भुगतान कर दिया गया.’ वहीं, कांग्रेस प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने ट्वीट किया, ‘मोदी सरकार के रफाल घोटाले की कहानी. किसी भी तरह से सौदा हासिल करो. महत्वपूर्ण प्रावधानों को दफा करो. विपक्ष के तमाम विरोध के बावजूद हम मोदी जी के दोस्त के लिए काम करेंगे.’