सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को शारदा चिटफंड घोटाले की जांच की निगरानी करने करने से साफ इंकार कर दिया. इस मामले की जांच शीर्ष अदालत ने ही 2013 में सीबीआई (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो) को सौंपी थी.

ख़बरों के मुताबिक चिटफंड योजनाओं में पैसा लगाने वाले कुछ निवेशकों ने शीर्ष अदालत में याचिका लगाई थी. इसमें कहा था कि 2013 से इस मामले की जांच सीबीआई कर रही है. लेकिन ये अब तक पूरी नहीं हो पाई. लिहाज़ा अब अदालत को इसकी निगरानी के लिए टीम गठित करनी चाहिए. इस पर मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई और जस्टिस संजीव खन्ना की दो सदस्यों वाली बेंच ने कहा, ‘हमारा सीबीआई जांच की निगरानी के लिए टीम बनाने का कोई इरादा नहीं है.’

ग़ौरतलब है कि शारदा चिटफंड मामले की सीबीआई जांच इस समय केंद्र और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच टकराव की वज़ह बनी हुई है. इसका कारण हैं कोलकाता के पुलिस आयुक्त राजीव कुमार. सीबीआई से पहले राजीव कुमार की अगुवाई वाली विशेष टीम ही इसकी जांच कर रही थी. इसी नाते सीबीआई ने राजीव कुमार से पूछताछ करनी चाही. लेकिन पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार राजीव कुमार के बचाव में उतर आई. ममता ने तीन दिन तक कोलकाता में इसके ख़िलाफ़ धरना भी दिया. हालांकि शीर्ष अदालत के दख़ल के बाद सीबीआई के शिलॉन्ग स्थित दफ़्तर में राजीव कुमार से पूछताछ का सिलसिला शुरू हो चुका है.