पश्चिम बंगाल में लाउडस्पीकरों के इस्तेमाल पर लगी रोक हटाने से सुप्रीम कोर्ट ने इंकार कर दिया है. इस बाबत राज्य की ममता बनर्जी सरकार के आदेश को भारतीय जनता पार्टी ने अदालत में चुनौती दी थी.

ख़बरों के मुताबिक ममता बनर्जी सरकार ने 2013 में एक आदेश जारी किया था. इसके जरिए शैक्षणिक संस्थानों के आसपास और रिहायशी इलाकों में लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया गया था. बाद में शीर्ष अदालत के आदेश पर सिर्फ राजनीतिक सभाओं और रैलियों आदि में लाउडस्पीकरों के उपयोग की इजाज़त दे दी गई. लेकिन भाजपा ने अपनी याचिका में दलील दी थी कि ममता बनर्जी सरकार इसमें भी भेदभाव कर रही है. वह इस आदेश की आड़ में भाजपा की रैलियां-सभाएं आदि रोक रही है.

याचिका में दलील दी गई थी कि ममता बनर्जी सरकार सुनिश्चित कर रही है कि लोक सभा चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल में भाजपा की रैलियां-सभाएं न होने पाएं. इस तरह राज्य सरकार अभिव्यक्ति की आज़ादी को कुचल रही है. लाेकतांत्रिक मूल्यों पर कुठाराघात कर रही है. पर सुप्रीम काेर्ट ने इन दलीलों को सिरे से ख़ारिज़ कर दिया. ग़ौरतलब है कि 2014 के लोक सभा चुनाव में भाजपा का मत प्रतिशत पश्चिम बंगाल में तीन गुना तक बढ़ा था. इसके बाद से ही ममता बनर्जी की पार्टी-टीमसी (तृणमूल कांग्रेस) और भाजपा में टकराव जारी है.