कांग्रेस पार्टी में अध्यक्ष राहुल गांधी के बाद अब स्वाभाविक तौर पर उनकी बहन और पार्टी की नई महासचिव प्रियंका गांधी को सबसे ताकतवर माना जा रहा है. राहुल-प्रियंका की मां सोनिया गांधी की राजनीतिक सक्रियता काफी कम हो गई है, इसलिए उन्हें इस चर्चा से अलग रखना बेहतर होगा. लेकिन राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के बाद कांग्रेस में सबसे ताकतवर नेता कौन हैं?

इस सवाल के जवाब में अलग-अलग लोगों के अलग-अलग दावे हो सकते हैं. लेकिन इसका एक संकेत सोमवार को प्रियंका गांधी ने भी दिया. इस दिन प्रियंका गांधी का पदार्पण न सिर्फ पूर्वी उत्तर प्रदेश के प्रभारी के तौर पर लखनऊ में हुआ बल्कि उन्होंने ट्विटर की दुनिया में भी कदम रखा. पहले ही दिन कुछ ही घंटों में ट्विटर पर उनके फाॅलोअर्स की संख्या एक लाख के पार चली गई.

लेकिन जिन्हें प्रियंका गांधी ट्विटर पर फॉलो कर रही हैं उनकी संख्या सिर्फ सात है. इनमें एक कांग्रेस पार्टी का आधिकारिक ट्विटर हैंडल है और छह कांग्रेस के नेता हैं. एक तो स्वाभाविक तौर पर कांग्रेस अध्यक्ष और उनके बड़े भाई राहुल गांधी ही हैं. उनके अलावा प्रियंका गांधी सिर्फ पांच और कांग्रेसी नेताओं को फाॅलो कर रही हैं. इस आधार पर यह कहा जा सकता है कि कम से कम उनकी नजर में पार्टी के अंदर ये पांच नेता सबसे ताकतवर हैं. आइए जानते हैं कि ये पांच नेता कौन हैं और इन्हें क्यों कांग्रेस पार्टी में सबसे ताकतवर माना जा सकता है.

अहमद पटेल

अहमद पटेल कांग्रेस पार्टी के कोषाध्यक्ष हैं. लेकिन पार्टी में उनकी रसूख की वजह सिर्फ उनका कोषाध्यक्ष होना नहीं है. जब सोनिया गांधी कांग्रेस अध्यक्ष थीं और केंद्र में मनमोहन सिंह की सरकार थी तो उस दौर में अहमद पटेल सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार और सबसे विश्वस्त थे. भाजपा में नरेंद्र मोदी और अमित शाह के उभार के बाद अहमद पटेल का इन दोनों के गृह राज्य से होना और इन दोनों की संयुक्त कोशिशों के बावजूद राज्यसभा में आ जाना भी उन्हें पार्टी के अंदर ताकतवर बनाता है. इसके अलावा अब भी अहमद पटेल पार्टी के संसाधन जुटाने से लेकर कई मामलों के प्रबंधन में सबसे अहम भूमिका निभाते हैं. राजस्थान विधानसभा चुनावों में भी आखिरी दौर में अहमद पटेल ने प्रबंधन के स्तर पर कई काम किए. इन वजहों से वे पार्टी अध्यक्ष बदलने और प्रियंका गांधी के सक्रिय होने के बावजूद पार्टी में ताकतवर बने हुए हैं.

अशोक गहलोत

अशोक गहलोत राजस्थान के मुख्यमंत्री हैं. इसके पहले वे कांग्रेस के संगठन महासचिव की भूमिका में थे. राजस्थान का मुख्यमंत्री बनने से पहले पार्टी के अंदर अशोक गहलोत को लेकर यही बात चल रही थी कि सोनिया गांधी के लिए जो भूमिका अहमद पटेल निभा रहे थे, राहुल गांधी के लिए वही भूमिका अशोक गहलोत निभा रहे हैं. वह चाहे गुजरात विधानसभा चुनाव रहा हो या फिर कर्नाटक में भाजपा को सरकार बनाने से रोकने का मसला, इन दोनों मोर्चों पर अशोक गहलोत बेहद सक्रिय भूमिका में रहे. राजस्थान में 2019 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को अच्छी सफलता की उम्मीद है. कहा ये जा रहा है कि राहुल गांधी ने इसी बात को ध्यान में रखते हुए राजस्थान की बागडोर अशोक गहलोत को दी है. कांग्रेस के अंदर चर्चा तो यह भी है कि जयपुर जाने के बावजूद अशोक गहलोत राहुल गांधी के नियमित संपर्क में रहते हैं. उन पर राहुल गांधी का विश्वास ही उन्हें कांग्रेस के ताकतवरों नेताओं में से एक बनाए हुए है.

ज्योतिरादित्य सिंधिया

ज्योतिरादित्य सिंधिया मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री बनने की दौड़ में थे. लेकिन अंत में वहां बाजी कमलनाथ के हाथ लगी. जिस उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्से का प्रभारी बनाकर कांग्रेस ने अपने तुरुप के इक्के यानी प्रियंका गांधी को राजनीति में सक्रिय किया है, उसी प्रदेश के पश्चिमी हिस्से का प्रभार बतौर कांग्रेस महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया को दिया गया है. उत्तर प्रदेश में राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी ज्योतिरादित्य सिंधिया को बिल्कुल प्रियंका गांधी के बराबर का महत्व देते दिख रहे हैं. नई दिल्ली के पार्टी मुख्यालय में भी दोनों का कार्यालय एक ही कमरे में बना है. राहुल गांधी की राजनीतिक योजना में उत्तर प्रदेश की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका है. इसलिए राहुल गांधी ने प्रियंका के साथ यहां ज्योतिरादित्य सिंधिया को लगाया है. राहुल गांधी के इसी विश्वास की वजह से सिंधिया मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की दौड़ में पिछड़ने के बावजूद कांग्रेस में ताकतवर बने हुए हैं.

रणदीप सुरजेवाला

रणदीप सुरजेवाला कांग्रेस के ‘कम्युनिकेशन इंचार्ज’ हैं. महत्वपूर्ण मुद्दों पर कांग्रेस की ओर से आधिकारिक बयान जारी करने का काम उनका ही है. हाल ही में वे भले ही हरियाणा के जींद से विधानसभा उपचुनाव हार गए हों लेकिन, उनका रसूख कायम है. प्रवक्ता किस तरह से महत्वपूर्ण मुद्दों पर पार्टी का पक्ष रखेंगे, यह तय करने की जिम्मेदारी रणदीपा सुरजेवाला की ही होती है. उनके बारे में कहा जाता है कि वे राहुल और प्रियंका गांधी दोनों के चहेते हैं. दोनों के पसंदीदा होने की वजह से वे पार्टी में ताकतवर बने हुए हैं.

सचिन पायलट

सचिन पायलट के बारे में माना जा रहा था कि बतौर राजस्थान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष उन्होंने जिस तरह से काम किया है, उसकी वजह से उन्हें प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है. लेकिन कांग्रेस को पूर्ण बहुमत नहीं मिलने और 2019 के लोकसभा चुनावों की वजह से उन्हें उपमुख्यमंत्री पद से ही संतोष करना पड़ा. हालांकि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व यानी राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की नजर में उनकी उपयोगिता बनी हुई है. पार्टी के अंदर हो रही चर्चाओं पर जाएं तो राहुल गांधी को लगता है कि राजस्थान में पार्टी के भविष्य की योजनाएं सचिन पायलट के आसपास ही रहेंगी. यही वजह है कि मुख्यमंत्री की दौड़ में पिछड़ने के बावजूद सचिन पायलट कांग्रेस के ताकतवर नेताओं में से एक बने हुए हैं.