मद्रास हाई कोर्ट ने अपोलो अस्पताल द्वारा दायर उस याचिका पर अंतरिम आदेश पारित करने से इनकार कर दिया है जिसमें तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जे जयललिता के निधन से पहले किए गए इलाज की जांच रोकने की मांग की गई थी. तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता की मृत्यु दिसंबर 2016 में चेन्नई के अपोलो अस्पताल में हुई थी. उनकी मौत से जुड़ी परिस्थितियों पर बाद में कई तरह के सवाल उठे थे. इसके बाद राज्य सरकार ने सितंबर 2017 में एआईएडीएमके की इस शीर्ष नेता की मौत की जांच के लिए जस्टिस ए अरूमुघस्वामी के नेतृत्व एक जांच आयोग का गठन कर दिया था.

पीटीआई के मुताबिक महीने भर पहले इस आयोग की वकील ने आरोप लगाया था कि राज्य के स्वास्थ्य सचिव जे राधाकृष्णन ने एक साजिश के तहत अपोलो अस्पताल के साथ सांठगांठ करके जयललिता को जरूरी इलाज से वंचित रखा था. अपोलो अस्पताल ने इस आरोप को आधार बनाकर अपनी याचिका में दावा किया है कि आयोग का रवैया उसके प्रति दुराग्रह भरा है इसलिए इलाज से जुड़ी जांच पर रोक लगाई जाए. लेकिन हाई कोर्ट ने इस दलील के आधार पर फिलहाल कोई फैसला देने से इनकार कर दिया. अदालत ने इसके बाद आयोग को एक जवाब दायर करने का निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई 15 फरवरी को तय की है.