नागरिकता संशोधन बिल के विरोध में भूपेन हजारिका के परिवार ने भारत रत्न सम्मान लौटाने का फैसला किया है. बीते 25 जनवरी को ही मोदी सरकार ने भूपेन हजारिका को देश के इस सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजे जाने का ऐलान किया था.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक इस फैसले की जानकारी भूपेन हजारिका के पुत्र तेज हजारिका ने असम के एक स्थानीय न्यूज़ चैनल को दी है. अमेरिका में रहने वाले तेज ने सोमवार शाम कहा कि वह अपने पिता को दिए गए भारत रत्न को स्वीकार नहीं करेंगे. उनके मुताबिक इस समय असम में नागरिकता संशोधन बिल को लेकर जो कुछ हो रहा है, उसे देखते हुए वह इस पुरस्कार को स्वीकार नहीं कर सकते.

हालांकि, 67 वर्षीय तेज हजारिका ने अभी तक इस फैसले के बारे में कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है.

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक इस निर्णय को लेकर भूपेन हजारिका के परिवार में एक राय नहीं दिख रही है. भूपेन हजारिका के भाई समर ने इस फैसले पर नाखुशी जाहिर की है. रिपोर्ट के मुताबिक समर हजारिका का कहना है कि भारत रत्न सम्मान लौटाने का फैसला इस तरह व्यक्तिगत रूप से नहीं लिया जा सकता है.

भूपेन हजारिका के परिवार द्वारा भारत रत्न लौटाना भाजपा और मोदी सरकार को असहज कर सकता है. हाल ही में असम दौरे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भूपेन हजारिका को भारत रत्न दिए जाने का मुद्दा उठाया था. उन्होंने कहा था, ‘जो सम्मान भूपेन हजारिका को बहुत पहले मिल जाना था, वह अब जाकर मिला है.’

इसी दौरान मोदी ने यह भी कहा था कि नागरिकता कानून को लेकर कुछ लोग भ्रम फैला रहे हैं. केंद्र सरकार असम और पूर्वोत्तर के सभी राज्यों की सांस्कृति, भाषा और संसाधनों की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है. असम में नागरिकता संशोधन विधेयक पर कई दिनों से प्रदर्शन हो रहे हैं. अब तक सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया जा चुका है.